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एक प्रेम कहानी -इजहार -2

इजहार(part-2)

 

आज इस कहानी में एक प्रेम कहानी लिख रही हूँ । इस कहानी को शीर्षक इजहार नाम दी हूँ क्योकि यह कहानी एक दूसरे के इजहार  पर आधारित है। अब इस कहानी को  शुरू करतेे है-

 

अंजु ने दौड़ कर साहिल का हाथ पकड़ लिया

और साथ चलने लगी और बोली मुझे तो तुम्हारा साथ चाहिए हमेशा के लिए।

 

एक प्रेम कहानी- इजहार

 

साहिल और अंजु की प्रेम की गाड़ी अब चल पड़ी थी ,दोनों एक-दुसरे के बिना अब कही जाना।

पढ़ना पसन्द भी नहीं करते थे और साहिल को अंजु के नोट्स के साथ ही पढ़ना पसंद था।

कॉलेज में सब अब दोनों को केवल एक-दुसरे के कारण  ही जानने लगे थे। 

 

अब दोनों की बाते फेसबुक में भी होने लगी थी। ( इजहार )

 

साहिल एक दिन अचानक फेसबुक पर अंजु के फ्रेंड लिस्ट को देखा, तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ।

लड़को में केवल साहिल ही फ्रेंड था, अंजु के लिस्ट में….

साहिल ने तुरंत अपने फ्रेंड लिस्ट से कॉलेज और स्कुल के सारे लड़कियों को हटा दिया।

अब साहिल  फ्रेंड लिस्ट में सिर्फ लड़कियों में अंजु थी। 

 

साहिल के दोस्तों को यह सब बचकाना लगता था।

 

और सभी दोस्त कहते जो दिल में हो उसे और कही रखने की जरुरत नहीं

और तुम दोनों को देख के ही लगता है … 

तुम दोनों सिर्फ एक-दुसरे के लिए बने हो और अब तो हमें कॉलेज ख़त्म होने का बेसब्री से इंतजार है।

नागिन डांस जो करना है, तुम दोनों की शादी में…

साहिल कुछ कहता तो नहीं पर उस पल का इंतजार तो अब साहिल को भी था। 

 

अंजु पढाई में तेज थी और साहिल भी, दोनों का इंट्रेस्ट पढ़ने में और बढ़ गया था।

 

क्योकि अब साथ में ही पढ़ना होता था।

 

दोनों अब सेकंड ईयर में थे और अब फोर्थ सेम का एग्जाम होने वाला था।

शाम को दोनों ने  मूवी देखने का प्लान बनाया और मूवी देखने चले गए। 

छोटी सी बात में दोनों में लड़ाई हो गयी ,दोनों एक दूसरे से दो दिन तक बात ही नहीं किये।

कि उसकी गलती है… मै क्यों फोन करूँ या मै  क्यों मनाऊँ । 

दो दिन के बाद एग्जाम था और साहिल के पास अंजु के बनाये उस सब्जेक्ट  के नोट्स नहीं थे।

 

साहिल को हमेशा अंजु के नोट्स पढ़ने की आदत थी। ( इजहार )

 

लेकिन अंजु से बात तो हो नहीं रही थी,उसे बता पता यह सब।

उसी की एक क्लास मेट थी।

अर्पिता जब साहिल से अर्पिता का बात हुआ तो,

 साहिल ने बताया की उस सब्जेक्ट का उसके पास नोट्स नहीं है।

अर्पिता, बोली साहिल  इस सब्जेक्ट का  नोट्स मैंने बनाया है,तुम्हे जरुरत है तो फोटोकॉपी करवा लो…

तो साहिल  ने कहा ठीक है, तुरंत कॉपी करवा के तुमको वापस करता हूँ। 

 

एग्जाम के लास्ट पेपर के बाद अंजु ,साहिल के पास आई ,साहिल आगे चलने लगा तो।

 

अंजु ने दौड़ कर साहिल का हाथ पकड़ लिया।

 

और साथ चलने लगी और बोली मुझे तो तुम्हारा साथ चाहिए हमेशा के लिए। 

 साहिल ने यह सुनते ही अंजु का हाथ कस कर पकड़ लिया।

 

और दोनों ऐसे बाते करने लगे जैसे कुछ हुआ ही न हो। 

 

 रोज रात को जब दोनों बात करते थे , नोट्स के बारे में बाते होती थी।

अंजू इन सब बातो से चेक करती की साहिल ने मेरे नोट्स पढ़े है की नहीं।

एग्जाम की पहली रात को जब बाते कर रहे थे।

 

अंजू को अहसास हुआ की साहिल उसके बनाये नोट्स  को नहीं पढ़ा है।

और न ही उसके बारे में कुछ बता पा  रहा  है। 

साहिल ने इस बार अर्पिता के नोट्स को पढ़ा था। 

साहिल ने कहा…मैंने अर्पिता से लिया था।

इस विषय का नोट्स….इतना सुनते ही।

अंजु को बहुत गुस्सा आया साथ ही अंजु के अहंकार को भी चोट पंहुची । 

 

गुस्से में अंजु ने कहा तुम कैसे किसी और का नोट्स पढ़ सकते हो ?

साहिल बस अंजु के तरफ देख रहा था और उसका प्यार को समझ भी रहा था।

लेकिन अब प्यार के साथ हक़ का रिश्ता भी बन गया था ,दोनों का

और जहा हक़ हो तो मीठी तकरार तो होगा ही…जो प्यार को और मजबूत बना देता है। 

 

अंजु वहा से चली गई ,लेकिन गुस्से के साथ एक असुरक्षा का अहसास भी हो रहा था ।

साहिल को पता होता था अंजू मान जाएंगी और वो हर बार अपने से ही मान जाया करती थी। 

 

साहिल ने फोर्थ ईयर में पहुंचते ही,अपने घर में सबको अंजु से मिलवा दिया।

और बता भी दिया की, मैं इसी से शादी करुँगा।

और अंजु तो अपने घर में पहले ही बता चुकी थी।

वैसे भी अंजु की बचपन से एक आदत थी, अपनी माँ को सब कुछ बता देती थी।

अब साहिल से झगड़ा हो तो भी अंजु की माँ को पता होता था।

 

दोनों के परिवार वालो को दोनों के रिश्ते से कोई अपत्ति नहीं थी।

 

साहिल को अंजु ही सारा सब्जेक्ट पढ़ाती थी और साहिल अंजु को गणित पढ़ाता  था।

एक दिन साहिल पढ़ा ही रहा था।

दोनों किसी बात पर झगड़ पड़े ,अब शाम के 6 बज चुके थे।

साहिल वहां से अपना बैग लेके निकल गया अपने हॉस्टल के लिए,

 

जब भी झगड़ा होता तो…अंजु साहिल के पीछे भागती थी और हाथ पकड़ लेती थी। ( इजहार )

 

लेकिन इस बार थोड़ा देर हो गई अंजू गुस्सा  हुए वही बैठी रही और साहिल वहां से चला गया ।

उसने कभी अंजु को नहीं बताया था हॉस्टल के किस सेक्शन में रहता है।

अंजु ने भी कभी नहीं पुछा  क्योकि लड़कियों का वहां जाना होता ही नहीं था। 

 

साहिल के जाने के बाद अंजू रोते  हुए थोड़े देर वही रुकी ,और उठी तो थी।

 अपने रूम को जाने के लिए,लेकिन बॉयज हॉस्टल के तरफ स्कुटी मोड़ दी।

लेकिन उसे पता ही नहीं था साहिल का रूम किस सेक्शन में है।

वहां पर पहुंचते 7 pm हो चुके थे ,और रूम मिलते-मिलते एक घंटे बीत  गया ।

बड़ी मुश्किल से अंजु को रूम मिला और वहाँ पहुंचकर बेल बजाया तो…

 

साहिल का बेस्ट फ्रेंड और रूम मेट बाहर आया,

 

इस समय अंजु को हॉस्टल में देख कर उसे बहुत आश्चर्य हुआ।

तुरंत अंदर जा कर साहिल को बताया।

लेकिन साहिल को लगा,अमित मजाक कर रहा है और  वो बाहर ही नहीं आया। 

 

अमित को कही जाना था, इतना बोल कर वो चला गया।

लगभग एक घंटे बाद जब वापस आया ,तो देखा अंजू बाहर  ही खड़ी  है।

तुरंत साहिल के पास जा कर बोला तुमको जाने बोला था।

बाहर अंजू आई है, क्यों नहीं गया वो अभी तक बाहर खड़ी है। 

 

इस बार साहिल बाहर निकला, साथ ही घडी देखते हुए।

रात के नौ बज चुके थे, बाहर  पहुंचते ही बोला कल बात करेंगे।

चलो तुमको छोड़ के आता हूँ, अंजू बोली मुझे अभी बात करनी है।

 

और जैसा हर बार बोलती थी वैसा ही फिर से बोली…  

 

मुझे तुम्हारे साथ ही रहना है हमेशा और इस बात पर साहिल हमेशा फ़िदा हो जाया करता। 

 

हर झगडे के बाद रिश्ता जैसे और मजबुत होते जा रहा था।

अब दोनों का इंजीनरिंग भी कम्पलीट भी हो गया।

अब अंजू ने  हैदराबाद से गेट का तैयारी करने का सोचा।

और अंजु के पापा ने वहां पर अंजु के लिए पुरी व्यवस्था कर दी।

लेकिन अंजु चाहती थी साहिल भी साथ चले। 

 

साहिल भी यही चाहता था, लेकिन अंजु को कैसे बताता थोड़ा पैसे का परेशानी थी घर में,

हैदराबाद से रोज अंजु फ़ोन करती और बोलती जल्दी आओ न यहाँ सीट फुल हो जायेगी।

अपने पापा से कह कर अंजु ने, साहिल का एडमिशन फार्म  भी भरवा दिया। 

 

साहिल ने भी अपने घर में बात की सबने उसे कहा पहले बताना था।

जाओ जल्दी तुम, दुसरे ही दिन साहिल अपने अंजू के पास जाने के लिए निकल पड़ा।

अब सबसे बड़ी परेशानी थी दोनों का हॉस्टल बहुत दूर-दूर था। 

तो साथ अब कैसे पढ़े, क्लास करने में ही बहुत समय बीत जाता था।

लेकिन अब साहिल को साथ पढ़ने का आदत बन चूका था, उसे अंजु का पढ़ाना  ही समझ आता था। 

 

दोनों ने मिल कर, कोचिंग के नीचे  ग्राउंड जो की बहुत गन्दा था को साफ़ किया। 

जहा पर वो दोनों पढ़ सके, वही पर एक पागल औरत भी बैठे रहती थी।

 

जो दोनों को साथ पढ़ते देख बहुत खुश होती थी।

 

जब साहिल ने उसके बारे में पता किया तो पता चला की वो औरत प्रोफेसर थी। 

 

अब वहां पर पढ़ने वाले बच्चो की सख्या भी बढ़ गई।

जो बहुत गन्दा हुआ करता था, वो बहुत ही साफ बन गया था।

वो औरत वही पर दिन भर बैठती सब बच्चो को देख कर खुश होती रहती।

उसके पागलपन का किसी को पता नहीं था लेकिन वो औरत बुद्धिमान तो बहुत थी। 

 

एक दिन एक अनजान नंबर से साहिल को बार-बार मैसेज आ रहे थे।

 

उसे कुछ लगा की शायद यह नंबर किसी का है जिसे वो जानता  है।

लेकिन ध्यान  नहीं दिया। एक दिन क्लास में एक लड़की उसी के तरफ देख रही थी।

साहिल को लगा शायद यही होगी लेकिन उसे लगा…मै इतना क्यों सोच रहा हूँ?

और जब भी क्लास पहुँचता तुरंत मैसेज आता,आज लाल टी-शर्ट में  बहुत स्मार्ट लग रहे।

 

रोज  ऐसा ही होता जैसे क्लास पहुँचता तुरंत मैसेज आता।

 

एक दिन क्लास में जाते ही साहिल ने वो नंबर डाइल कर दिया।

उस लड़की का मोबाइल जैसे बजा वो थोड़ा डर गई।

साहिल पास जाकर उस लड़की से पूछा, रोज मैसेज क्यों करती हो?

उस लड़की ने कहा – अंजु ने बोला था, ऐसा करने को।

 

साहिल को बुरा लगा, इतने दिनों बाद भी विश्वाश नहीं या मुझे वो जानती नहीं। 

 

अंजु का तबियत इस बीच ख़राब हो गया।

और अंजू की स्थिति ऐसी हो गई की उसे हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा।

साहिल ने अंजु के माता-पिता को फ़ोन करके बता दिया, दुसरे ही दिन अंजू के माता-पिता वहां पर पहुंच गए।

पहले दिन तो अंजु के साथ हॉस्पिटल में साहिल रुक गया।

लेकिन वहा से साहिल के रूम का दुरी बहुत था।

 

डॉक्टर ने कहा था, घर का खाना देने को तो साहिल के पास किचन का सामान तो था नहीं।

अपने दोस्तों के साथ मिल कर साहिल ने एक स्टोव कुकर जो सामान्य जरुरत था।

वो सब लिया और अंजू के लिए खिचड़ी बना कर ले जाया करता था।  

 

जब तक अंजु हॉस्पिटल में थी।

 

सुबह-शाम  साहिल जाता, उतना दुर वो पैदल ही चल दिया करता था।

जब तक अंजु ठीक होकरआई, साहिल का तबियत ख़राब हो गया था।

साहिल के दोस्त हमेशा उसको बोलते एग्जाम पास है।

 

तुमको अंकल-आंटी  को बोलना चाहिए था न ,देखो अब तुम भी बीमार पड़ गए। 

 

थोड़े दिनों के बाद साहिल भी ठीक हो गया।

लेकिन अंजू अब जिद करने लगी की हॉस्टल को छोड़ कर तू पास कही किराये के रूम  में रहो।

पहले तो साहिल ने मना किया क्योकि इससे किराया भी जायदा देना पढता साथ ही खाना भी खुद बनाना पढता।

 अंजू ने ही साहिल के लिए अपने हॉस्टल के पास ही रूम दिला दिया। 

 

लेकिन इस रूम में पीने का पानी आता ही नहीं था।

 

तो अंजू सुबह से दो बोतल पानी अपने हॉस्टल से साहिल के लिए ला देती थी।

सुबह ही साहिल अपने लिए खाना बना लेता।

और फिर दोनों साथ में पढाई करते और शाम में अंजु अपने हॉस्टल चली जाती थी। 

साहिल और अंजु ने जब से एक-दुसरे को जाना था।

 

मोबाइल नंबर एक ही लेते बस लास्ट का नंबर अलग होता था। 

 

साहिल ने हैदराबाद में भी अंजु को बिना बताये दो सिम ले आया।

साहिल के पास एक और मोबाइल था उसमे एक सिम को लगा दिया।

और अंजू के साथ शरारत करने का सोच के एक मैसेज किया।

लगभग पांच मिनट बाद मैसेज का रिप्लाई भी आ गया।

 

जिसका साहिल को बिलकुल उम्मीद नहीं था।

 

लगभग 20 मिनट तक चैट करने के बाद ,साहिल ने अपने नंबर से अंजु को कॉल किया।

अंजु ने कहा फ़ोन उठा के की, वो अभी पढ़ रही बात नही कर पायेगी। 

लेकिन नए नंबर से अब भी बात हो ही रही थी,अंजु की

 

इस बात को साहिल यकींन नहीं कर पा रहा था।

 

दुसरे दिन जब मिले तो भी अंजु को बीच -बीच  में साहिल मैसेज करता और अंजु तुरंत रिप्लाई करती।

साहिल जब वापस आ रहा था तब अंजू से पूछा क्या तुम किसी से चैट कर रही थी। 

अंजू ने कहा, नहीं ऐसा तुम्हे क्यों लगा ?

 

साहिल बोला कुछ नहीं ऐसे ही। ( इजहार )

 

लेकिन नए नंबर से लगातार तीन दिन तक बात करने के बाद साहिल जबअंजु से मिला।

तो फिर पूछा तुमने किसी से बात किया क्या?

 

अंजू ने फिर भी न में उत्तर दिया तो, साहिल ने कहा…

 

तुम अपनी माँ से बहुत प्यार करती हो न ,उसकी कसम तो झुठी नहीं होगी। 

लेकिन अंजु ने अपनी माँ की झुठी कसम भी, बोल दिया अब साहिल के बर्दास्त से बाहर हो गया था। 

उसने कहा पांच साल शायद मै तुम्हे नहीं जान पाया या कही कुछ कमी है।

साहिल ने नए नंबर से कॉल किया और जैसे ही अंजु का फ़ोन में रिंग आया

तो साहिल बोला तीन दिन से तुम मुझसे ही बात कर रही थी।

 

मैंने नया सिम लिया था ,हम दोनों के लिए। 

 

इतना सब कुछ सामने आते ही अंजु रोने लगी और साथ में कहने लगी मैंने क्या और क्यों किया।

मुझे नहीं पता…लेकिन अब साहिल वहाँ से जा चुका था। 

साहिल रूम पंहुचा तो उसकी डेली डायरी सामने ही रखी थी

उसे उठाया और गुस्से में फाड़ के आग लगा दिया और पहली बार बच्चो के जैसे रोने लगा। 

 

दुसरे दिन अंजु नहीं आई और नहीं उसका फोन आया। 

एक उम्मीद हमेशा रहती थी की, हर झगडे के बाद अंजु ही मनाया करती थी।

 

वो भी ख़त्म हो गई। ( इजहार )

 

दो-तीन दिन अंजू नहीं आई तो साहिल अपने दोस्तों के पास वापस चला गया।

लेकिन अब पढाई  कैसे करे अंजु के बिना। 

 

अब एग्जाम भी सामने था ,साहिल की स्थिति अच्छी नहीं थी वो अंजु को हर पल मिस करता।

अब बात भी नहीं हो पाती थी।

 

क्योंकी फेसबुक ,मोबाइल , ईमेल सभी जगह अंजू ने साहिल को ब्लॉक कर दिया था।

वो यह भी जानना चाहता था किसकी गलती है।

इस बीच  दोस्तों ने साहिल को बहुत समझाया और बहुत मदद भी सम्हालने की। 

 

एग्जाम ख़त्म  होने के बाद साहिल को लगा।

 

शायद अब अंजू साथ में जाएगी ,यह सोच के उसके रूम में चला गया।

वहां  उसके मम्मी पापा आये थे और अंजु जाने वाली थी।

दूसरे दिन अपने मम्मी पापा के साथ।

हमेशा साहिल,अंजु साथ में ही आया जाया करते थे। 

 

वहां से आने के बाद अपने बेड पर सो गया। ( इजहार )

 

अपनी पुरानी बातो को याद करने लगा और सोचने लगा।

साहिल ने अपने आप से कहा हमारा रिश्ता इतना कमजोर था।

की इतनी जल्दी हम एक-दुसरे को भुल गए ।

साहिल भी वहां  से अपने घर आ गया, कुछ दिन बाद गेट का रिजल्ट भी आ गया।

इतने दिनो के बाद उस दिन अंजु ने कॉल किया।

और जैसे ही साहिल ने कॉल रिसीव किया अंजू ने कहा मै  पहली बार जीवन में असफल हुई हूँ …..

यह सब तुम्हारे कारण हुआ। 

इजहार

 

मै  कितना टेंशन लेते रही और तुम अच्छा पढ़ के पास भी हो गए। 

 

साहिल ने कहा मेरे कारण  हुआ है ?

मेरी क्या स्थिति थी क्या तुम्हे पता था।

ठीक है नहीं बात करना तो ,तुम अपने पढाई पर ध्यान दो ,और अंजू ने कॉल कट कर दिया। 

 

कुछ सालो बाद बस स्टैंड में अचानक अंजु दिखी ,साहिल अपने आप को रोक नहीं पाया

उसके करीब चला गया शायद अब भी कही, अंजु थी साहिल के दिल के कोने में।

लेकिन दोनों की ज्यादा बात तो नहीं हुई, अंजू ने बताया वो बैंक में जॉब करती है।

साहिल प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर था …. शायद दोनों यही जानना चाहते थे। 

 

उसी दिन शाम को अंजु का कॉल आया ,फ़ोन उठाते ही पहला सवाल किया।

क्या तुम मुझसे शादी करोगे  … साहिल ने कहा नहीं और तुम करना चाहोगी मुझसे शादी…अंजु ने कहा … (थोड़ी देर सोचने के बाद )… नहीं।

 

अंजु और साहिल ने प्यार का इजहार तो नहीं किया था।

फिर भी प्यार बहुत किये एक-दुसरे से, लेकिन नफरत का इजहार आज  दिल से कर रहे थे।  

 

इस छोटी सी कहानी मै वो अहसास देने की कोशिश की हूँ जो कि सभी लोग इस इजहार के अहसास को महसूस कर चुके है या करने वाले होंगे।

अगर यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो मुझे कमेंट बाक्स में कमेंट करके जरूर बताएगा।

    

3 thoughts on “एक प्रेम कहानी -इजहार -2

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