Stories

फोन कॉल (part one)

फोन कॉल

 

जैसे ही डोरबेल बजी उषा अपने पुराने दिनों से बाहर आई देखा।

तो दोपहर के दो बज चुके थे, और बच्चे स्कूल से आ गए थे।

और उषा जल्दी से किचन की ओर भागी  . . . . 

 

 

उषा की शादी को दस साल होने कोआया था, इन दस सालो में उसकी पूरी दुनिया पति और बच्चे  ही थे।

बाहर की दुनिया लगभग इस भागदौड़ में भूल गई थी।

उषा हाउस वाइफ है, और उसके दो बच्चे और साथ में बीमार सास साथ मे रहते थे।

ससुर का देहांत हुए दो साल बित गये थे, पति रोहनआईटी कंपनी में कार्यरत था।

बस यही उसकी दुनिया थी। 

 

शादी के पहले रोहन के कंपनी में साथ काम किया करती थी, काफी होनहार और दिखने में सुन्दर भी थी।

जो उससे मिलता उसके तरफ आकर्षित हो जाता, और बिना तारीफ किये बिना रह नहीं पाता।

रोहन और उषा का लव मैरिज हुआ था, साथ की इंटरकास्ट जिसके वजह से उषा का मायका में आना-जाना

नहीं होता था।

 

उषा अपने मायके जाने के लिए कभी-कभी तड़प उठती, लेकिन उसके घर वालो की नाराजगी ख़त्म होने का

नाम ही नहीं ले रही थी।

जब उषा ने इंटरकास्ट मैरिज  किया था, तो यह बात सुनकर उषा के पिता को दिल का दौरा पड़ा, और

उनका देहांत हो गया।

तब से उषा की माँ को उषा से नफरत हो गयी, लास्ट टाइम  बस  इतना बोली थी,उषा को…

क्या कमी रह गई थी बेटा, एक बार बताना भी उचित नहीं समझा।

 

मै मना लेती सबको …

रोहन अपने माता-पिता का एकलोता संतान था, और कुछ दिन बाद दोनों  को दोनों ने अपना लिया था।

बस उषा की सास को हमेशा लगता की हम अपनी मर्जी की न बहु  ला पाए, न दहेज़।

इसके लिए रोज उससे ताना भी देने लगी थी। 

उषा शादी के बाद सिर्फ एक ही साल जॉब कर पाई।

 

एक साल के बाद वो माँ बनने वाली थी, और इस बीच सास की भी तबियत खराब हो गयी।

इन सब के कारन उषा ने जॉब छोड़ने का फैसला लिया।

रोहन से कहा, मैं जॉब दो साल बाद शुरू कर  लुंगी।

लेकिन दो साल के होते-होते उषा दूसरी बार माँ बनने वाली होती है।

 

वो अपना जॉब तो लगभग भूल चुकी थी।

 उषा का समय अब बच्चो और सास की सेवा में गुजर जाता, लेकिन वो कभी शिकयात नहीं करती।

लेकिन रोहन ऑफिस से आते ही गुस्सा करता, कभी अस्त-व्यस्त पड़े खिलोनो पर तो कभी माँ का ध्यान

ठीक से नहीं रख पाई इसके लिए।

कभी उषा से यह जानना ही नहीं चाहा की वो अब क्या चाहती है।

 

लेकिन उषा भी समझती थी, रोहन को ऑफिस में बहुत काम होता है।

और आज-नहीं तो कल वो उषा की परिस्थति भी समझेगा।

उषा की बेटी अब स्कूल जाने लगी थी, उषा को समय की गति का अहसास नहीं हो रहा था।

रोहन का काम का बोझ और बढ़ता जा रहा था, तो उषा को समय देना ही भूल गया था, रोहन…

जब भी उषा घर के काम से फ्री होती पुराना एल्बम निकाल कर बैठ जाती, और अपनी पुरानी यादो में खो

जाती।

और अब सास के साथ रोहन भी बोलता, करती ही क्या हो घर का कम ही न।

 

मुझे ऑफिस के पचासो काम होते है,पूरा दिमाग का काम होता है।  

जब भी रोहन ऐसा बोलता उषा की आंखे भर आती और सिर्फ एक ही बात बोलती मैंने सब कुछ छोड़ा था,

रोहन तुम्हारे लिए।

हर बार रोहन का जवाब होता मैंने नहीं कहा था, सब कुछ तुम अपनी मर्जी से करती आई हो. . .

 

उषा फिर से अपने काम में लग जाती जैसा कुछ हुआ ही न हो अब तो फोन पर भी किसी से बात नहीं होती,

नहीं फेसबुक चलाती है।

सुबह और शाम केवल बच्चो की परवरिश और पति और सास की सेवा में निकल जाता था।

कभी मन भी करता किसी से बात करने का तो समझ नहीं आता किससे बात करे।

 

दोस्तों के साथ-साथ अपने माँ, बहनो और भाइयो से दूर हो गई थी। 

अब दोनों बच्चे स्कूल जाने लगे, कभी-कभी उषा को बहुत अकेलापन महसूस होता जब बच्चे स्कूल में

होते तो।

एक दिन उषा अकेले बैठी थी उसे अपने कॉलेज फ्रेंड की याद आई और विनय की भी उसने लैपटॉप

उठाया और अपना पुराना फेसबुक अकॉउंट को एक्टिव किया।

सबसे पहले विनय का प्रोफाइल चेक किया और बहुत बेचैनी से देखने लगी।

विनय क्या करता है, कहा रहता है, शादी की या नहीं…. कितने बच्चे है।

 

लेकिन विनय के प्रोफाइल से कुछ पता ही नहीं चला।

एक मैसेज किया हाय विनय, कैसे हो आज तुम्हारा प्रोफाइल देखा फोटो भी पुरानी है।

इतना लिखकर लैपटॉप बंद कर दिया।

लेकिन उसे अब बहुत बेसब्री से इंतजार था विनय के जवाब का . . .

और खाना बनाने चली गई, साथ ही अपने पुराने दिनों मे भी खो गई।

कॉलेज के दिनों में बहुत एन्जॉय किया करते थे, सब मिलकर और उषा तो कॉलेज की जान हुआ करती थी।

 

साथ विनय की भी, दिन भर विनय उषा के पीछे -पीछे घुमा करता।

विनय हमेशा उषा से कहता मेरी रानी बन जाओ ढेरो खुशियाँ दूंगा तुम्हे…

लेकिन हमेशा उषा उसके बातो को मजाक में लेती, उषा को अब वो कॉलेज का आखरी साल याद आ रहा था। 

जब विनय उसके लिए फूल ले कर खड़ा था, और बार-बार अपने प्यार का इजहार कर रहा था।

 

और उषा की सहेलिया, उषा को कह रही थी।

उषा ये लड़का तुमसे बहुत प्यार करता है, और तुम्हारे कास्ट का भी है।

तुमको हमेशा खुश रखेगा, लेकिन उषा ने जवाब दिया…मुझे विनय कभी दोस्त से ज्यादा  कुछ लगा

नहीं. . . 

 

सभी  भूल कर  अपने काम में लग गए ,उषा ने एक आईटी कंपनी ज्वाइन कर ली।

विनय भी कही चला गया और उषा की पक्की सहेली पिंकी ने शादी  कर ली।

सबकी जीवन एक नई राह पर चल पढ़ी थी, बाते भी नहीं के बराबर होती।

क्योकि अब नए काम भी और नए दोस्त भी जीवन में आ गये थे, उषा बहुत खुश थी।

रोहन को ऑफिस में जब पहली बार देखा, देखते ही दिल दे बैठी और अब उसका सारा ध्यान रोहन पर ही

रहता।

 

रोहन देखने में बहुत ही  खूबसूरत था, और आकर्षक व्यक्तित्व भी था।

इस बार वेलेंटाइन डे को ऑफिस के सारे  फ्रेंड ने मिलकर पार्टी रखी, थीम में सभी को लाल रंग का ड्रेस

पहनना था।

तो उषा ने एक गाउन पहना और सजने सवरने में कोई कमी नहीं की, और पार्टी ख़त्म होते ही एक गिफ्ट और अपना लवलेटर रोहन के हाँथ में थमा दिया।

 

और अब बड़ी बेचैनी से वो रोहन का हाँ या न का इंतजार करने लगी…

दूसरे दिन ऑफिस गई तो रोहन को देखते ही शरमाते हुए बोली अपने मेरा गिफ्ट नहीं देखा।

रोहन बोला, अरे मै तो भूल ही गया।

एक महीने बाद जब उषा ने उम्मीद छोड़ दिया था, रोहन ने कहा तुम्हे पसंद करता हु…

 

पर उतना भी नहीं और मुस्कुराने लगा। 

उषा को जब अपना जवाब हा में मिला तो खुशी से बहुत दिनों बाद अपनी  बेस्ट फ्रैंड को फोन लगाया।

जब पिंकी ने फोन उठाया एक साँस में सब कुछ बता दिया, पिंकी  का जवाब था।

जो तुमसे प्यार करे, वही एक अच्छा जीवन साथी होता है …  एक बार विनय के बारे में और सोच लो।

 

इतना सुनते ही उषा ने गुस्से में फोन कट किया…

और बोली रोहन से अच्छा कोई हो ही नहीं  सकता मेरे लिए।

जैसे ही डोरबेल बजी उषा अपने पुराने दिनों से बाहर आई, देखा तो दोपहर के दो बज चुके थे।

बच्चे स्कूल से आ गए थे और उषा जल्दी से किचन की ओर भागी  . . .  

 

 

 

 

   to be  continued 

4 thoughts on “फोन कॉल (part one)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate Page »