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अनजाना डर

अनजाना डर

लड़का बोला लगभग आधा घंटा और लगेगा, ये सुनकर दोनों कापने लगी।

रात के 10 बज चुके थे और अंधेरा भी बहुत हो गया था

दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर चलने लगी ताकि कुछ अनहोनी हो तो तुरंत साथ में भाग सके।

temple run
अनजाना डर

                                               

डर… कभी-कभी डर का कोई कारण नहीं होता मन में शंका होती है, की कोई अनहोनी न हो जाये।

नकारत्मकता के इस दौर में गलत विचार अपने आप मन में आ ही जाते है ।

वैसे गलत, सही विचार तो मनुष्य के अपने बनाये महल है ।

सुधा और रेखा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, चलो शुरू करते है एक ऐसी  ही  एक कहनी  …               

सुधा और रेखा जो की पक्की सहेली थी, उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ ।

या हम यह कह सकते है की हुआ कुछ भी नहीं बस अनजाने डर से दोनों काप रहे थे…

बहुत दिनों बाद फैमिली  टूर का प्लान बना, सुधा और रेखा के परिवार में भी आपस में बहुत बनती थी।

दोनों परिवार ख़ुशी-ख़ुशी जाने की तैयारीया करने लगे सुधा और रेखा की माँ ने रास्ते में खाने के लिए ढेर सारी चीजे बनायीं।

सब बहुत खुश थे सुबह का इंताजर बेसब्री से कर रहे थे।

जैसे-तैसे रात कटी, सुबह हो गयी सभी तैयार हो गए, ट्रैन से जाना था सब निकल पड़े सुधा और रेखा बहुत खुश थी।

क्योकि अब कुछ दिन दोनों एक साथ रहेंगे, दोनों में गहरी दोस्ती तो थी ही हर चीज एक दूसरे से शेयर करती थी।

और एक दूसरे के साथ समय बिताना भी बहुत अच्छा लगता था, दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे।

तो कभी भी मिलने एक-दूसरे के घर पहुंच जाया करते थे।

लेकिन घूमने का प्लान यह  पहली बार था, वो भी फॅमिली टूर…सोच के ही बहुत दिन पहले से खुश थे।

सफर शुरू हो गया दोनो ऊपर की सीट में बैठ गयी, कभी बाते करती तो कभी फोन पर लगे रहती…

बीच-बीच में कहानियो का पुस्तक या पेपर पड़ती और साथ में खाना-पीना तो चल ही रहा था।

सुबह होते ही ट्रैन अपनी मंजिल पर पहुंच गयी, सभी उतर कर होटल चले गए वहां से तैयार होने के बाद पहाड़ के नीचे एक देवी मंदिर था।

वहां से पूजा करने के बाद पास ही में एक मार्केट था, जहाँ जाकर बहुत खरीदारी किये।

रंग-बिरंगी चुडिया, कपडे खिलोने सब कुछ था वहां, सुधा और रेखा अब 16 साल की हो गयी थी।

पहली बार इस तरह घूमने बाहर गए थे, तो बहुत खुश और रोमांचित थे दोनों। 

अब 2 बज चुके थे, सब ने खाना खाया थोड़ा आराम करने के बाद शाम को लगभग 5 बजे सब निकले तो पता चला की नजदीक में एक पहाड़ के ऊपर एक मंदिर है।

सभी जाने को तैयार हो गए वहा पर।

बीच मे एक नदी थी उसके पास पहुंचते ही देखा की, चारो तरफ चन्दन के पेड़ थे।

जिसकी खुशबू चारो तरफ फैली हुई थी।

कुछ नारियल के पेड़ भी थे, सबने उस दृश्य का आनंद लिया नदी में मस्ती के बाद वहां से शिव दर्शन के लिए निकल गए।

कुछ सीढ़ी चढ़ने के बाद  वह मंदिर दिखने लगा, सबमे उत्सुकता थी वहां पहुंचने की।

दिन ढल गया था रौशनी वाली रात और गर्मी का दिन होने के कारण अभी सब दिख रहा था। 

रेखा और सुधा अपने धुन में सीढ़ी  चडेते  जा  रही  थी, उनको पता ही नहीं चला की उनके परिवार वाले बीच रास्ते से ही कब  वापस नीचे उतर  गए।

सीढ़ी  हर जगह एक सी नहीं थी कही सीढ़ी  फिर कही पत्थरो का रास्ता था।

दोनों बातो में इतने मशगूल थे उनको  पता ही नहीं था की नीचे जाने का कोई रास्ता भी है की नहीं, वैसे भी अँधेरा हो रहा था।

तो ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा था।

सामने एक साई मंदिर दिखा जहाँ बैठ कर दोनों थोड़ा इंताजर करने लगी।

उस समय शाम के 7  बज रहे थे।

दोनों बहुत डर गए थे की परिवार वाले क्यों नहीं आ रहे।

उस समय सिर्फ कुछ लोग ही वहां दिखाई दे रहे थे, फिर हिम्मत करके एक आदमी को पूछने की कोशिश की, की नीचे जाने का रास्ता कहाँ है।

उसने कहा की लगभग  यहाँ से 1 /2  घंटे का रास्ता है, उसके बाद शिव मंदिर है।

और उसके दूसरे तरफ से नीचे  उतरने के लिए सीढ़ी है।

उसके साथ जो दूसरा आदमी था उसने कहा यहाँ शाम 6  बजने के बाद कोई नहीं आता। 

इस टाइम शराबी और चोर उचक्के आते है, तुम दोनों के लिए ये जगह ठीक नहीं, जल्दी चले जाओ कहकर चले गए।

अब आठ बज चुका था, दोनों  अब घबरा गए थे और अब अँधेरा भी हो गया था।

रास्ता घुमावदार था, कुछ समझ नहीं आ रहा था किधर जाये।

चंदन की खुशबू चारो तरफ फैली हुई थी, लेकिन अब इस सुंदरता की  तरफ कोई ध्यान ही नहीं जा रहा था।

थोड़ा देर चलने के बाद दोनों एक जगह रुक गए अब आगे कुछ समझ नहीं आ रहा था की किधर से उतरे , अब  सुधा और रेखा का रोने का  मन कर रहा था। 

तभी पीछे से एक आवाज सुनाई दी और उसने कहा की इस समय यहाँ कोई औरत नहीं आती, ये जगह तुम लोगो के लिए ठीक नहीं है।

शराबी जुआरी, चोर उचक्के बहुत है, यहाँ से तुम लोग जल्दी से चले जाओ। 

अँधेरे में उस लड़के की बस आवाज सुनी  घबराहट में उसको देखा भी नहीं, फिर सुधा ने हिम्मत करके कहा।

क्या आप हमारी नीचे जाने में मदद करोगे।

इस पर लड़के ने हा में उत्तर दिया और बोला, मेरे पीछे आओ,वो लड़का अब बात कर रहा था।

दोनों उसके पीछे-पीछे बहुत तेज चल रही थी, की कब पहुंचे और अपने परिवार वालों  से मिले।

रात के 9 बज चुके थे मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं था, एक अनजाना डर अब हावी हो गया था।

डर से दोनों काप रहे थे, झींगुर की चिल्लाने की आवाज चारो  ओर से  आ रही थी।

रास्ते में शराब पीते लोग बैठे हुए थे।

और वह लड़का बात करते जा रहा था।

लेकिन उन दोनों का उसकी बातो पर कोई ध्यान ही नही था।

सामने एक मंदिर दिखाई दिया यह वही शिव  मंदिर था, उस लड़के ने कहा जितनी सीढिया अभी चढ़ी है।

उतनी ही अब नीचे जाने में लगेंगे ,चलो यहाँ दर्शन कर लो।

लेकिन डर के वजह से दर्शन से ज्यादा नीचे पहुचने की जल्दी थी।

दर्शन करने के बाद पंडित जी ने प्रसाद और हाथ में धागा बांधा चेहरे में डर के भाव को समझकर….

थोड़ा हिम्मत बंधाई की थोड़े देर में तुम लोग नीचे पहुंच जाओगे । 

लड़का बोला लगभग आधा घंटा और लगेगा, ये सुनकर दोनों कापने लगी। 

रात के 10 बज चुके थे,और अंधेरा भी बहुत हो गया था।

दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर चलने लगी ताकि कुछ अनहोनी हो तो तुरंत साथ में भाग सके।

लड़के ने कहा  मै  यहाँ हर महीने आता हु, बिजनेस करता हु 21 साल का हु।

आप डरो नहीं, मै आपको नीचे पंहुचा दूंगा और पूछने  लगा आप लोग कहा रुके हो, कौन – कौन साथ है और भी बहुत कुछ… 

दोनों इस वक्त कुछ बोलना सुनना नहीं चाहती थी, बस परिवार से मिलना चाहती थी दोनों चुप  थी।

अब सभी नीचे पहुंच चुके थे, दोनो के जान में जान आई और साथ में मोबाइल में नेटवर्क भी आ गया।

सुधा ने तुरंत अपने पापा को फ़ोन किया, तो पता चला परिवार वाले  उससे भी ज्यादा डरे हुए थे।

लड़के ने पूछा गन्ना रस पियोगे…

दोनों लड़कियों ने उसका चेहरा भी नहीं देखा था, न ही धन्यवाद् बोल पाये तुरंत वहां से कुछ बोले बिना चले गये।

इतनी मुसीबत में एक अनजान लड़का जो की बातो से मारवाड़ी लग रहा था, ने मदद की, जिसकी सिर्फ बाते  याद थी। 

घर पहुचने के बाद दोनों ने अपनी ख़ुशी का पल तो साझा किया और साथ में एक दुःख भी था की उस लड़के को धन्यवाद भी न बोल पाए।

ना ही  चेहरा देखे, बस याद थी तो उसकी बाते।

खुशिया बाटे तो सब से ,पर वो अनजाना  डर हमेशा  दिल में ही रह गया..  

 
 
 
 
                                       
 
 
 
 
             
 
 
 
 
  

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