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अनोखा प्यार

अनोखा प्यार

 

वहाँ से  वेदिका निकल तो गई पर, अब भी मन में अनगिनत सवाल उठ रहे थे।

ऐसा अनोखा प्यार कैसे हो सकता है, जिसके लिए सबके नजरो में भी बुरा बनना स्वीकार हो…

कोई  ऐसा कैसे कर सकता है। 

आइये शुरु करे कहानी का सफ़र अनोखा प्यार ।।।।

 

अनोखा प्यार

 

वेदिका को सजने सवरने का बहुत शौक था, और आने वाले दिनों में वेदिका के बुआ के बेटे की शादी थी।

इस बार  सोचा सामने के पार्लर  से हो आये। वेदिका पहली बार इस  पार्लर  में जा रही थी।

जब वह पहुंची तो उसे इंतजार करना पड़ा।

उसे इस बीच अंदर से दो-तीन महिलाओ की आवाजे सुनाई पढ़ रही थी।

साथ में जोर-जोर से हसने की भी, और  वेदिका का ध्यान इधर-उधर देखने में था। 

 

पार्लर के पीछे घर है ऐसा लग रहा था।

वेदिका को,क्योकि बिच-बिच में बच्चो की आवाजे भी आती थी, जो अपनी मम्मी के लिए होता था।

थोड़ी देर में एक सुन्दर सी महिला बाहर आई, और हँसते हुए बोली माफ़ करना आपको इंतजार करना पड़ा।

दरसल शादी का सीजन  चल रहा तो काफी व्यस्त समय चल रहा है, और वेदिका का जवाब था कोई बात

नहीं।

फिर उस महिला ने अंदर की तरफ इशारा करके कहा चलिए।

और अब की बार आप मुझे काल करके आना, मैं अपना नंबर दे दूंगी आपको इंतजार करना नहीं पड़ेगा। 

 

वेदिका ने अब उस महिला की ओर ध्यान से देखा सुन्दर तो थी ही वो।

उसकी आँखों में चमक भी था और साथ ही अपने जीवन और अपने काम से उसे बहुत प्यार था।

ऐसा उसकी बातो और पार्लर को व्यवस्थित देख के साफ झलक रहा था, और बाते करना तो शायद उसे बहुत पसंद था।

वो अब भी बोल ही रही थी।

 

अब जा कर वेदिका से पूछा क्या कराना था वैसे आपको, साथ ही बोली आपका शुभ नाम मैं जान सकती हु।

जवाब में कहा वेदिका ने, जी बिलकुल मैं वेदिका और आपका नाम, उस महिला ने जवाब दिया सुमन

वेदिका से रहा नहीं गया।

 

उसने तुरंत कहा आपका नाम आपके जैसा ही है खूबसूरत, कोमल,आकर्षित और जीवन में  रंग भरने वाली…..

ऐसा सुनकर सुमन हँसते  हुए बोली… आपने कुछ ज्यादा ही तारीफ नहीं  कर दी।

चलो, अब बताओ आपको क्या करवाना है, अब वेदिका का फेशियल हो चूका था।

सुमन ने वेदिका को कहा आप चाय लेंगी…वेदिका हा  में सर हिलाया।

सुमन ये कहते हुए डोर ओपन किया, इसलिए मैंने घर में ही पार्लर बनाया है।

ताकि बच्चो को घर को और अपने काम को समय दे पाउ….

तुम भी अंदर आओ न, वेदिका उठ के अंदर चले गई। 

 

घर बहुत सुन्दर सजा हुआ था,सुमन किचन में चली गई।

कुछ देर  में सुमन चाय लेकर आई और हँसते  हुए बोली, लीजिये चाय और मैं अपने बच्चो से आपको

मिलवाती हु… शुभी, आरव यहाँ आओ।

मेरे दोनों बच्चे और साथ ही बताया पति जॉब करते है।

और यह मकान  किराये का है, और साथ ही वेदिका को बोली आपके कितने बच्चे है।

पति क्या करते है,वैसे आपको देख कर ही लग रहा…आप जॉब करते हो। 

वेदिका ने जवाब दिया  हा करती हूँ, अभी लीव पर हु मेरा बेबी है 3 महीने का,और पति बिजनेस करते है।

 

सुमन ने कहा अच्छी बात है।

बेबी को  कभी मिलवाने  लाना और साथ ही कहा अपने बच्चे बहुत प्यारे होते है।

सबको, और हर रूप में सुन्दर भी लगते है, चाहे नाक ही क्यो न बहती  रहे।

वेदिका ने  कहा, जी जरूर कुछ ही पलो में आप अपने से लगने लगे हो,मुंझे  सुमन जी वाशरूम जाना था।

सुमन ने कहा आइये…..  जैसे ही  निकले एक रूम पर ताला लगा हुआ था।

 

वेदिका को ताला के तरफ इशारा करते हुए सुमन ने कहा ये मकान  मालिक ने अपने लिए रखा है। 

साल में दो बार आते  है, और वहा से जैसे आगे बढ़े बहुत ही खूबसूरत फूलो का बगीचा था।

जिसे देख कर वेदिका खुश होकर बोली कितना सुन्दर-सुन्दर फूल है, क्या आपने  इस बगीचा को सजाया है। 

सुमन बहुत ही चहकते हुए उत्तर दिया,  मुझे फूलो से बहुत प्यार है,और  इस बगीचा के  वजह से इस  घर में हूँ।

 

जब मैं यहाँ आई थी, यहाँ पर केवल मदार के फूल  थे।

मैं और मेरा माली इन फूलो की देखभाल करते है।

माली हफ्ते  में दो  दिन आता है, वेदिका बीच में ही बोली,  दिन भर आप कितना  मेहनत करती हो।

हर जगह परफेक्ट भी लग रही हो, मैंने अपनी जिंदगी में  इतना बात कभी नहीं किया किसी अनजान से । 

लेकिन इन बातो में अब सुमन का ध्यान कहाँ था, उसके चेहरे की चमक और भी बड़  गई थी।

 

वो अब अपने खूबसूरत से फूलो के बगीचे में खो गई थी।

सुमन निरंतर बोले  जा रही और उसने  कहना शुरू किया, मुंझे  फूलो से बहुत प्रेम है।

बचपन से ही, आगे भी कहा पता है,.. सुबह अगर खूबसूत फूल देखो तो  अच्छा दिन जाता है।

चेहरे पर मुस्कान भी बनी रहती है, और साथ ही जीवन में फूलो की महक भी घुल जाती है।

 

लेकिन इसे बहुत प्यार भी देना पड़ता है….

नहीं तो फूल जल्दी मुरझा जाते है और पेड़ भी सुख  जाते है। 

मैंने आज तक एक भी फूल नहीं तोडा और न ही भगवान में चढ़ाया।

फूल तो पौधो में ही अच्छे लगते है।

और जब स्वतः ही फूल पौधे से  अलग हो  कर  जमीन पर बिखर जाते है तो वह दृश्य और भी  मनमोहक लगता है।

 

देखो जरा वहां पर ,वेदिका ने देखा सच में कितना सुन्दर लग रहा था।

सोच में भी पढ़ गई शायद सच्चा प्यार यही होता है।

जहा पर सोच ही नहीं होती वहा पर भी सोच ढूंढ लेती है। 

आगे सुमन बोलती रही यहाँ पर देखो यह  बारहमासी है, और इसे देखो यह ठण्ड के मौसम में खिलता है….

और भी बहुत कुछ सुमन बताये जा रही थी।उसको फूलो से गहरा प्यार  था, वह साफ झलक रहा था।

साथ में  बता रही थी, कौन सा फूल उसका माली लगाया और वो कौन सा  लगाई है। 

सुमन ने फिर बोला, मैंने अपनी शादी में भी फूलो का इस्तेमाल नहीं किया था।

जिसके वजह से बहुत लोगो का नाराज़गी  मैंने  झेला था।  पति ने साथ दिया,ऑरेंज मर्रिज होने क

बावजूद  ….

 

वेदिका को यह सब सुन कर  बहुत  आश्चर्य  लग रहा था।

और कुछ कहती,  इसके पहले सुमन ने कहा,…  पता है वेदिका , मेरा ससुराल यही है बहुत बड़ा घर है और बहुत बड़ा परिवार भी।

मेरे ससुराल का गार्डन भी बहुत बड़ा है।

 

जब नई दुल्हन बन कर गई, उस घर में तोगार्डन में एक भी फूल नहीं थे।

मैंने कड़ी मेहनत से फूलो का बगीचा तैयार किया, जिससे सासु माँ बहुत खुश हुई। 

लेकिन सुबह उठते ही, फूलो को मैं देख नहीं पाती थी।

सारे फूल मेरी सासु माँ चुन लेती थी, पूजा के लिए तो कभी मेरी जेठानी गजरे के लिए।    

और बिना फूलो के गार्डन सुना हो जाता था और मेरे चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती थी।

शुरू में तो कुछ नहीं बोल पाती थी, पर बाद में बोलना शुरू किया।

जिसके करण रिश्ते में कड़वाहट पनपने लगी थी।

लेकिन पति मुझे समझते थे, उन्होंने अपने घर में बात की और  हम यहा आ  गए। 

 

अब सब में पहले जैसा प्यार भी है….

और मेरे जीवन में भी बहार है, और साथ में मेरे पति का भी जिन्होंने मेरी बचकानी और अनोखा प्यार में मेरा साथ दिया। मेरे परिवार, हर रविवार को यहाँ आते है।

हम सारा दिन साथ में बिताते है, मेरी बचकानी हरकत पर हँसते है।

तभी सुमन की बेटी बाहरआकर बोली मम्मा भूख लगी है…

सुमन कुछ कहती इससे पहले वेदिका बोली चलो अब मुझे चलना चाहिए।

 

आपसे मिलकर अच्छा लगा और कभी आती हु, वैसे यह मेरा मायका है।

वैसे भी बहुत देर हो गई है, मेरा बेटु रोना शुरू करता है, तो चुप ही नहीं होता है…मेरे बिना। 

और वहाँ से वेदिका निकल तो गई पर  अब भी मन में अनगिनत सवाल उठ रहे थे।

 

ऐसा अनोखा प्यार कैसे हो सकता।

जिसके लिए सबके नजरो में भी बुरा बनना स्वीकार हो, कोई ऐसा कैसे कर सकता है। 

2 thoughts on “अनोखा प्यार

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