Featured Stories

चंदामामा

चंदामामा

आज नेहा के 12-13 महीने का बेटा है जो अभी थोडा थोडा 2-4 शब्द बोलना सीख चूका है

जब भी नेहा छत पर जाती, तो उसे भी वह चंदा मामा दिखाती|

बेटा बड़े प्यार से उसको देखता फिर, हाथो से इशारा करके बोलता….

चंदा मामा ,चंदा मामा आ आ ।

चंदा मामा……..दूर के ,पुए पकाए खीर के .

कुछ अनुभव जो कब कहा हो जाये, मिल जाये, जो दिल के कोने में कही बस जाते है |

और कभी अचानक याद आ जाते है जो मुस्कुरा जाते है, या सोचने में मजबूर कर देते है |

उन्ही खजाने में से कुछ लम्हे चुरा के आपके पास बिखेरती हूँ |

चंदा मामा इस नाम से सभी बचपन से ही परिचित होते है या करा दिए जाते है |

बच्चो को सबसे ज्यादा आकर्षित चंदा मामा ही करता है बचपन में नेहा को याद है।

जब सब आँगन में गर्मी के दिनों में खाट निकल कर बाहर बैठ बाते करते रहते थे।

तो नेहा अपनी माँ के गोद में सर रखकर, कहानी कविता सुनती और ध्यान से चंदा मामा को देखने में व्यस्त रहती।

कभी चंदा मामा आधा तो कभी पूरा, कभी बादलो के बीच से लुका-छिपी खेलता, कभी दूध सा सफ़ेद दिखता तो काले या दाग धब्बे वाला , कभी बहुत बड़ा या कभी सामान्य सा|

या यु कहे की मामा जी भेष बदलने वाले छलिया थे जो बच्चो को भाते थे |

नेहा इसे देखते देखते सपनो में खो कर सो जाती थी |

आज नेहा के 12-13 महीने का बेटा है, जो अभी थोडा थोडा 2-4 शब्द बोलना सीख चूका है।

जब भी नेहा छत पर जाती तो उसे भी वह चंदा मामा दिखाती |

बेटा बड़े प्यार से उसको देखता फिर हाथो से इशारा करके बोलता चंदा मामा ,चंदा मामा आ आ ।

इन सबसे नेहा खुश हो जाती और उसके बचपन में अपना बचपन पा कर |

एक दिन नेहा पति और बेटे मंदिर गये थे आते समय थोडा देर हो गया, चंदा मामा जी बाहर आ गये थे और नेहा के साथ- साथ चल रहे थे।

तीनो बाइक में थे बेटा बादल को देखता बड़ी मासूमियत से बोलता मामा मामा , चंदा मामा पुट्टी (टूट गया ) |

उस दिन चाँद आधा ही निकला था और बेटा शायद आधा चाँद पहली बार देख रहा था ।

जैसे नेहा बचपन में देखा करती थी आज बेटा भी काले सफ़ेद बादलो के बीच आधा चाँद देखकर बहुत उत्सुक होता था, तो कभी मायूस।

नन्ही सी जान को समझ कहाँ थी।

आधा चाँद देखकर रास्ते भर बोलता आया, मम्मी…. चंदा मामा पुट्टी चंदा मामा पुट्टी।

बेटा अब लगभग 2 साल का होने वाला है और थोड़े दिन आधा चाँद तो थोड़े दिन पूरा चाँद उसको बहुत आकर्षित करने लगा है।

बादल के बीच में चाँद का लुकाछिपी खेलना बेटा को बहुत पसंद आता है|

जिस दिन पूरा चाँद उस दिन बेटा भी बहुत खुश और आधा चाँद वाले दिन मन थोडा सा आधा हो जाता है|

ये ना समझी, नादानी भी बहुत अच्छा है॥ इस समझदार दुनिया में………

जब भी रात को नेहा और उसके पति याद करते है, तो बच्चे का मासूमियत भरा चेहरा आँखों के सामने आ जाता है…..

और एक हल्की, धीमी से मुस्कुराहट होंठो पर आ जाती |

3 thoughts on “चंदामामा

  1. सुंदर कहानियों के लिए सादर आभार

  2. Good job…… They way you express is really appriciated. The word play is impressive.
    Have a good day

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate Page »