Stories

डर (पार्ट -2 )

डर

 

कभी-कभी जीवन  में कुछ ऐसी घटनाये घटित होती है।जिस पर  यकीन कर पाना मुश्किल  हो जाता है। 

 

ऐसी ही कहानी है विजय की, जो उस डर से बाहर निकलने में कामयाब हुआ।

और साथ ही अपने डर को जीतने  में  भी ….

 

 

 

 

भविष्य के सपनो सजोये विजय, अपने सबसे करीबी दोस्त सिकंदर के साथ कॉलेज के नजदीक पीजी के रूम में रहने लगा।

विजय के पिताजी ने सिकंदर का साथ मिलने की वजह से ही  विजय  को जाने दिया।

और पीजी में उन दोनों की मुलाकात उनके रूममेट अमित से हुई।

अब तीनो साथ रहने वाले थे , और वो  दिन अच्छे से निकल भी गया।

रात में तीनो खाना खा कर सोने  चले गए तीनो एक ही  रूम में  पास- पास  बिस्तर लगा कर सो गए। 

 

दिन भर का थकान था, तो जल्दी सबको नींद आ गई और पहला दिन था।

तो  कमरा व्यवस्थित न हो पाना स्वाभाविक था। 

रात को करीबन 12pm के आस-पास अमित नींद से उठा तो…

उसने विजय को देखा, विजय जोर-जोर से अपना हाथ अपने बिस्तर पर मार रहा था।

पहले अमित को लगा विजय जाग रहा है, फिर उसने आवाज दी।

 

लेकिन विजय की ओर से कोई रेस्पोंस नहीं आया। 

तो अमित डर  गया और दूसरे तरफ मुँह  करके अपने चादर को खींच कर सो गया।

सुबह हो गई और  सब उठ चुके थे ,लेकिन रात की घटना से अमित को अभी भी थोड़ा विजय से  डर लग रहा था।

इस  वजह से वह  विजय से  ज्यादा बात नहीं कर पा  रहा था। 

दोस्ती सिकंदर से भी उतना अभी था नहीं, तो इस  बारे में अमित किसी से भी बात करना उचित नहीं

समझा।

 

 

लेकिन आज रात अमित ने  अपना  बिस्तर दुर  ही रखा।

करीबन एक सप्ताह होते-होते  तीनो थोड़ा करीब आ गए थे।

तीनो खाना खाने बैठे थे, तभी अमित ने उस रात की  बात बताई।

 

तो विजय ने कहा  मेरे साथ ऐसी घटनाये होती  रहती है।

तुम लोग डरना मत साथ ही बताया कभी-कभी नींद में , हँसता  हु ,तो कभी रोता हूँ।

कभी-कभी अजीब सा होता है, मेरे साथ  किसी भी चीज  को  देख कर कभी -कभी कही  खो जाता हूँ।

और ऐसा जब भी हो…

मुझे तुम लोग जोर-जोर से आवाज देना या किसी चीज से आवाज करने की कोशिश करना। 

ऐसा सुन कर अमित ने डरते हुए  कहा -क्या तुमको भूत दिखाई देता है ?

और सिकन्दर ने कहा इतना कुछ तो मुझे, तुमने पहले नहीं बताया था।

थोड़ा तो मुझे पता था।

विजय का उत्तर था….. हा अमित,तब सिकन्दर ने कहा कही ज्यादा हॉरर फिल्म तो नहीं देखते।

 

या बचपन में भूत प्रेत की  कहानी सुनी होगी!

विजय ने कहा नहीं सुनी कहानी पर कभी-कभी दोस्तों के साथ हॉरर मूवी देख लेता हूँ।

सिकन्दर और अमित दोनों  ने कहा अब हॉरर मूवी मत देखना।

हमें देखना होगा, तो हम दूसरे रूम में देखेंगे।  

फिर से आज रात जो भी  हुआ उससे सिकन्दर और अमित दोनों  बहुत  डर गए थे।

करीबन रात के दो बजे विजय जोर से चीखकर उठा तब सिकन्दर और अमित भी डर कर उठ गए।

और विजय से पूछा क्या हुआ तो, विजय ने कहा एक औरत जो सफेद साडी में थी।

उसे दबा रही थी और वो बहुत देर से चिल्लाने की कोशिश कर रहा था। 

पर आवाज ही नहीं निकल रही थी।

 

ऐसा सुन कर सिकंदर बोला, अभी तुम आराम करो शायद यह तुम्हारा वहम हो। 

दूसरे दिन तीनो कॉलेज चले गए, और रात वाली बात भी भूल गए।

नए दोस्त और नया क्लास काफी रोचक लग रहा था सभी को।

 

शाम में तीनो रूम में जब पहुंचे तो…

थोड़ी देर में विजय की माँ का कॉल आया,और विजय को अब वो रात की घटना याद आई और सारी  बात जब माँ को बताया। 

तब विजय की माँ की चिंता और बढ़ गई।

और यह सब बात जब विजय के पिता को पता चली तो विजय के पिता तुरंत गांव के बाबा के पास गए।

जहा पर बाबा ने बताया ये सब कालाजादु है जो गांव की तीन महिलाये मिल कर करती है।

और वो तीनो आपके घर रोज आती है।

 

जब यह बात विनय के माँ को पता चला, तो उनको अनुमान हो गया वो तीनो कौन  है।

वो अब उन महिलाओ से नफरत करने लगी। 

लेकिन इन सब बातो का विजय के पढाई पर कोई फर्क नहीं पढ़ रहा था।

लेकिन वो घटनाये जो विजय के जिंदगी में लगभग रोज होती थी।

वो अब भी जारी था।

 

जो एक डर तो हर रोज दे जाता साथ ही माता -पिता की चिंता बढ़ जाती।

और वो रात में चैन की नींद ही नहीं ले पाते  थे। 

विजय  को अँधेरे में बहुत डर लगता था।

और कभी रात में अकेला रहना पड़ जाये तो वो पूरी रात जागता था।

सो ही नहीं पाता था।

 

कुछ दिनों बाद विजय के रूममेट सिकन्दर ने एक बड़ा सा मिरर लाया।

जिसे उसने सामने ही लगा दिया।

जो बाहर के गेट से खड़े होकर कोई भी आसानी से देख सकते थे,और कॉलेज चला गया।

पीजी, कॉलेज से ही लगा हुआ था तो कभी-कभी कोई क्लास न हो तो रूम में आ जाया करते थे।

आज विजय भी आ गया।

जैसे ही गेट खोला उस बड़े से मिरर में अपने आप को देख कर वही खड़ा हो गया।

थोड़ी देर में अमित आया और विजय को ऐसा खड़े देख कंधे में हाथ रखते हुए बोला…क्या देख रहा है?

 

विजय इतने गौर से…

और साइड से होते हुए रूम में चला गया। 

थोड़ी देर में सिकन्दर आया, तब भी विजय वैसी ही खड़ा था।

सिकन्दर को समझ में आ गया क्या हुआ है उसने विजय को बहुत आवाज दिया।

फिर भी विजय उसी स्थिति में था, तो गेट को जोर जोर से अपने पैर से मारने  के बाद विजय को देखा।

तो भी विजय वैसे ही खड़ा था।

 

तब सिकन्दर अमित को इशारे से बाहर  बुलाने लगा तब अमित को वो बात याद आई जो विजय ने  बताया था।

वो डर के भागा…विजय, सिकन्दर और अमित का रूम तीसरी मंजिल में था। 

अमित इतना डर गया था, की दूसरे मंजिल से ही सीधे ग्राउंड में कूद गया।

 

सिकन्दर सीढ़ियों से भागता हुआ ग्राउंड पंहुचा।

अब तक अमित और सिकन्दर के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुन कर…

लगभग पूरा पीजी और कॉलेज के कुछ और बच्चे वहाँ पहुंच चुके थे।

लेकिन कोई विजय के पास जाने की  हिम्मत ही नहीं कर रहा था। 

तभी एक स्टूडेंड जो की विजय का सीनियर था।

वो गया और पीछे से विजय को आवाज दिया और विजय इस बार अपनी स्थिति  में आ गया।

 

और बड़े आश्चर्य से पूछा क्या हुआ?

और जब बालकनी से नीचे देखा और इतना भीड़ दिखा तो…  फिर से पूछा क्या हुआ था।

अब सिकन्दर और अमित भी वहाँ  पर पहुंच चुके थे। 

लेकिन इस बार विजय को थोड़ी शर्मंदगी महसूस हो रही थी।

सिकन्दर ने जब सारी  बात बताई और साथ में ये भी बताया की विजय उन दोनों को दौडा राहा था।

तो इस बात पर  विजय को यकींन  ही नहीं हो रहा था । 

यह अनुभव सबके लिए अजीब था, अमित और सिकन्दर रात में विजय से बोले…

अब हम दोनों दूसरे रूम में सोयेंगे तब विजय ने हाँ में सर हिला दिया।

दूसरे दिन विजय का बात जब, अपने माँ से हुई तो… यह सब बात बताई तो।

माँ ने कहा, कुछ दिनों के लिए घर आ जा…शाम में ही विजय अपने घर जाने को निकल गया। 

 

लेकिन घर में हुई वो पूजा आज भी विजय को याद थी।

जहा-जहा पर नारियल दरवाजे में और आँगन में दबाया गया, बकरे का सर।

जब भी याद आता विजय डर जाता था।

घर पहुंचने के बाद, माँ से जब विजय की बात हुई।

और माँ ने जब बताया उन महिलाओ और काला जादू की बात ,तो विजय और डर गया।

जब भी उन औरतो को देखता, अपने घर या घर के बाहर तो विजय डरने लगता। 

 

पीजी आने के बाद भी यह सब जारी रहा।

लेकिन एक रात विजय उठा और रात में और पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।

जब दोस्त नींद से जागे  तो विजय को न पा कर ढूढ़ने निकले और उसे रूम वापस लेकर आये।

फिर से जब यह बात विजय के पिताजी को पता चली तो…

वो गुस्से में बोले – यह सब उन तीनो औरतो के कारण हो रहा है।

मैं  इन तीनो को अब जान से मरवा दूंगा……. 

लेकिन यह बात विनय के दिमाग में बैठ गई।

एक फैसला लिया की, अब जो कुछ भी हो…उसके साथ।

वो घर में अब नहीं बताएगा।

 

क्योकि पिताजी अब बहुत ही परेशान हो चुके थे।

और गुस्से में ही सही एक गलत बात भी बोल गए थे। 

विजय ने सबसे पहले सारे ताबीज उतार दिया और उसके बाद रात में तो अकेला सोने ही लगा था।

अँधेरे में भी सोने की कोशिश करने लगा।

कुछ दिन तो अँधेरे में डर  लगा पर धीरे-धीरे सब कुछ सही होने लगा था। 

रोज होने वाली घटनाये तो होती ही थी।

 

पर विजय अब इसे घर वालो के साथ-साथ अपने दोस्तों को भी बताना बंद कर दिया था। 

जिससे काफी बदलाव महसुस करने लगा था,अब घर का माहौल  भी अच्छा हो गया था।

विजय के माता-पिता अब खुश थे, एक बुरी बला से जो विजय को छुटकारा मिल गया था। 

विजय अब जब भी घर जाता जिन चीजों  से उसे डर  लगता  था।

 

उन चीजों  को वो अब ध्यान देना छोड़ दिया था।

साथ ही उन औरतो के तरफ भी अब ध्यान नहीं देता था। 

अब विजय के साथ ऐसी घटनाये होना भी बंद हो गया…विजय ने अपने डर से जीत हासिल कर ली थी। 

6 thoughts on “डर (पार्ट -2 )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate Page »