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ड्रेसिंग टेबल

ड्रेसिंग टेबल

सुधा जब भी किसी दुकान या मॉल में जाती वह के बड़े-बड़े दर्पण उसको खूब आकर्षित करते।

और उसमे अपने आप को देखकर बहुत खुश होती।

अपने पति को  कहती मुझे भी ऐसा दर्पण चाहिए।

माइ ड्रेसिंग टेबल
dresing table

सभी के जीवन में किसी न किसी चीज की चाहत जरुर होती है।

वह कुछ भी हो सकती है, ख़्वाहिस बड़ी या छोटी नहीं हो…बस होती है जो हर इंसान के लिए अलग-अलग होती है।

ऐसी ही एक कहानी है सुधा की, जिसकी चाहत आपको अजीब और छोटी लगे ,,,,,

सुधा शादीशुदा, घरेलु महिला, जिसके दो छोटे-छोटे बच्चे है।

जो की स्कूल जाते है, सुधा जब भी किसी दुकान या मॉल में जाती वह के बड़े-बड़े दर्पण उसको खूब आकर्षित करते।

और उसमे अपने आप को देखकर बहुत खुश होती,  और अपने पति को  कहती मुझे भी ऐसा दर्पण चाहिए।

सुधा का पति राकेश खेती किसानी करता, जब भी सुधा उससे ऐसा बोलती।

तुनक कर जवाब देता,,,,  क्या करेगी ऐसे दर्पण का, कौन सा तुम्हे फैशन शो में जाना है. . .  

सुधा चुप रह जाती और अपना मन मार लेती। 

सुधा एक दिन अपने सहेली के साथ जा रही थी की रास्ते  में एक कारपेंटर की दुकान में उसे ड्रेसिंग टेबल दिखा।

वह एकदम से खुश होकर बोली कितना सुन्दर है न,  इसमें तैयार होने का मजा ही कुछ और होगा।

सुधा की सहेली उसे देखते हुए बोली क्या सुधा तुम भी न  …

सुधा अब हर रोज उस ड्रेसिंग टेबल को पाने की चाहत रखती।

लेकिन अपने पति को कुछ बोल नहीं पाती, उसको पता तो था।

अपने बच्चो की फीस और बाइक का लोन, घर का खर्च फिर भी सुधा हिम्मत करके एक दिन अपने पति  से बोलती है।

कारपेंटर के दुकान में मैंने एक ड्रेसिंग टेबल देखा है।

क्या हम उसे खरीद सकते है… मैंने उस दुकान वाले से बात किया है।

वो क़िस्त में देने को तैयार हो गया है।

राकेश डाटते  हुए बोला….  क्या करेगी दर्पण का?

सुधा उदास हो जाती है, मुरझाया चेहरा देख कर राकेश बोला ठीक है।

अगले महीने देखता हूँ, शायद खरीद पाऊ…

ऐसे सुनते ही सुधा इतनी खुश हो गयी मानो उसे ड्रेसिंग टेबल अभी मिल गया हो।

और वो सोचने लगती है…

चूडियो के खानो में रंग बिरंगी चुडिया, नेल पॉलिस और सारी श्रृंगार  की सामग्री कहाँ व  कैसे सजायेगी।

और अगले महीने का इंतजार बहुत बेस्रबी से करने लगती है।

एक एक दिन कैसे बीतता है वह सुधा को ही पता था। 

जैसे-तैसे महीना कट जाता है, राकेश इस महीने भी ड्रेसिंग टेबल लेने से मना करता है।

और कहता अगले महीने देखते है….

सुधा थोड़ा उदास हो गयी।

लेकिन अगले महीने का इंतजार करने लगी,  इसी इंतजार में कई अगले महीने आते है और गुजर जाते है …

सुधा की ये चाहत कभी नहीं बुझती बस एक उम्मीद में जिन्दा रहती है, की आज नहीं तो कल वो महिना आएगा’|

कुछ दिन बाद सुधा की बेटी की शादी थी।

वह पति के पास आकर बोली, बिटिया के लिए एक ड्रेसिंग टेबल जरूर लेना …


 

 

 

 

 



 



                 

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