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फर्क

फर्क

कितना फर्क था दोनों में,  ये औरत पैसो से और वो औरत दिल  अमीर थी। 

फर्क


दिसंबर में अनु के भाई की शादी है, वह अभी से क्या पहनने वाली है।

यह सोच रही थी।

क्योकि उसके भाई की शादी थी… तो वह सोच रही थी, की किस तरह मै भीड़ में अलग और सुन्दर दिखु।

कभी लहंगा तो कभी साड़ी …बहुत सोचने के बाद वह साड़ी का फैसला करती है।

और अपनी एक सहेली को फ़ोन करके बुला लेती है।

दोनों एक शॉप में गए,  एक सज्जन से आदमी ने दोनों का स्वागत किया।

उस आदमी को लगा ये दोनों थोड़ी महँगी साड़ी खरीदेगी, ये सोच कर उसने तुरंत चाय भी पूछ लिया।

थोड़ी देर में उसने सुन्दर-सुन्दर साड़ीया दिखाना शुरू कर दिया।

इतने में एक औरत अन्दर आई और उसे देख कर लग रहा था।

वो काम करने वाली बाई है, उसने दुकानदार से कहा -1000  से शुरू होने वाली साड़ी दिखाना।

दुकानदार ने कहा आप पीछे के काउंटर में आओ वहां काम रेंज की भी साड़िया है।

उस औरत ने मुस्कुरा कर कहा, नहीं भैया मुझे हजार रेंज की साड़िया ही चाहिए।

उससे 100 -200  ऊपर हो तो भी चलेगा।

और चहक कर बोली मेरी मालकिन की बेटी की शादी  है। 

फिर दुकानदार ने उसे 2 -3  साड़ी दिखाई ही थी की उस औरत ने झट से बोल दिया…

बिटिया को हलके रंग की साड़ी पसंद है,  वह बहुत गोरी है ना। 

और आख़िरकार एक क्रीम कलर की साड़ी उठाकर कर कहा बेटा यह साड़ी  बिटिया पर खूब जचेगी।

इसे ही देदो मुझे।

अनु यह सब ध्यान से देख रही थी कितना अपने पन से साड़िया खरीद रही थी।

जैसे मालकिन की बेटी नहीं उसकी खुद की बेटी हो…

अब अनु का भी शॉपिंग हो गया था अनु वह बात वही भूल कर चली गयी। 

इधर अनु के ननद का रिश्ता भी तय हो गया, अनु को अब ढेर सारी शॉपिंग  करनी थी।

सबसे पहले उसने अपनी ननद के लिए साड़ी और लहंगा लेने का सोचा और ननद के साथ पहले साड़ी खरीदने एक शॉप में गयी। 

वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी, तो दोनों को इंतजार करना पड़ा, इतने में उसकी नजर एक औरत पर पड़ी जो काफी अमीर लग रही थी।

बहुत सारी महँगी -महँगी साड़िया खरीद रही थी।

अनु का ध्यान उसी पर था करीबन एक घंटे  उसकी शॉपिंग ख़त्म हुई और उस औरत ने दुकानदार से कहा – सस्ती वाली साड़ी चाहिए।

दुकानदार ने कहा किसी को देना है क्या?

औरत ने कहा, हाँ काम वाली बाईयो को देना है लगभग 4 -5 लगेंगी मुझे।

दुकानदार ने 500 वाली साड़ी लाकर रखी ही थी, की औरत ने कहा इतनी महँगी नहीं चाहिए…

200-300  का ही देना।

दुकानदार गया बण्डल लेकर आया और दिखाने लगा, औरत ने बेमन से साड़ी बिना देखे ही यह कहते हुए उठा लिया।

बाई के लिए ही तो है…

अनु को वो औरत याद आई।

कितना फर्क था दोनों में  ये औरत पैसो से और वो औरत दिल अमीर थी। 

                                     
                                               

 




 
 

 

 
 
 
 

  

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