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गठबंधन (Part-2)

गठबंधन(पार्ट-2)

 

गठबंधन पार्ट-1 में अपने पढ़ा सूरज को प्यार कैसे और किससे हुआ और अब हम आगे की कहानी में क्या हुआ पढ़ते है ।

 

आइये शुरू करे गठबंधन(पार्ट-2)

 

गठबंधन(पार्ट-2:-)दुसरे दिन अनाया वहा से चली तो गई लेकिन अपने आप को वो गुनहगार समझ रही थी ।

उसने कभी नहीं सोचा था, की अपनी बेस्टफ्रेंड की खुशियों में चिंगारी उसी के कारण लग जाएगी।  

 

GATHBANDHAN PART -2

 

स्टेज से लेकर शादी के  मंडप तक सूरज का ध्यान अनाया पर ही था।

पूजा के तरफ देखा भी नहीं और पूजा का ध्यान सूरज के तरफ था।

और सोच रही थी भगवान उसे किस बात की सजा दे रही है। उससे क्या गलती हो गई।

इस दिन का इंतजार क्यों था उसे ,क्या इन सब में उसकी गलती है,यह सोच कर आँखों में अंशु की धारा रुक नहीं रही थी।

वहां पर मौजूद लोगो को लग रहा था ,बेटी घर से दूर हो जाने के गम को सह नहीं पा रही है। 

सूरज को यह सब बुरा सपना सा  लग रहा था।

जिस पल का इंतजार बड़े बेचैनी से था। 

वो पल ही जीवन का सबसे बुरा पल सा महसुस हो रहा था। 

 

दोनों के चेहरे में मायूसी छा गई थी, लेकिन शादी के लिए अब न भी  नहीं कर सकते थे।

दोनों ने बहुत ख़ुशी से इतना कुछ किया था,और न सुनकर घर वालो का क्या हाल होता।

अनाया इन सब बातो से अनजान थी।

अपनी सबसे प्यारी सहेली की शादी में नाच गा रही थी।

अनाया ने आज अपना सबसे पसंदीदा रंग का लहंगा पहन रखा था।

अनाया बहुत खुबसूरत लग रही थी गुलाबी लहंगे में।

पुजा के पास आकर जब बैठी तो पुजा को एक अजीब सा चीड़  होने लगा था अनाया से…

वो अब अनाया को ही अपनी स्थिति का गुनाहगार मान रही थी। 

 

अनाया के पास आने से सूरज का मन हो रहा था सब कुछ उसे अभी के अभी बता दे।

लेकिन अब कैसे इसका कोई मतलब भी तो नहीं था।

इन सब कश्मकश में दोनों की शादी भी हो गई,और पुजा दुल्हन बन कर सूरज के घर भी आ गई।

सभी रश्मे रिवाज भी ख़त्म हो गए थे, और अब सब  मेहमान भी चले गए।

सूरज काम के कारण घर से बाहर ,दुसरे शहर में रहता था। शादी के बाद पुजा को लेकर जाने का वादा भी किया था।

जैसे ही सूरज को,सूरज की माँ ने  कहा नई बहु साल भर यही रहेगी।

हमें भी तो अरमान है कुछ। 

 

सूरज ने सिर्फ इतना कहा – जैसा आप सही समझे, लेकिन एक बार पुजा से भी पुछ लो वो क्या चाहती है।

कल ही जाना चाहता हूँ मैं….

पुजा ने कहा कुछ दिन यही रह जाती हु ,शादी हुए सात दिन बीत चुके  थे।

लेकिन न सूरज ने बात की और न ही पुजा ने…

दोनों के बीच एकअजीब सी ख़ामोशी छा गई थी।

 

पुजा का प्यार तो सूरज ही था, लेकिन सूरज का अनाया।

सूरज दूसरे दिन चला गया, लगभग एक सप्ताह बाद पुजा ने सूरज को कॉल किया और कहा हम तो हमेशा से बात किया करते थे।

सामने न सही फ़ोन में तो बात कर सकते है। सूरज ने भी इसे सही समझा और अब बात फिर से होने लगी।

लेकिन अब पुजा से बात  करके  पहले जैसा सुकून और ख़ुशी सूरज को नहीं होती थी।

दिल से आवाज आती अनाया तो नहीं है ये,

लेकिन इन सब के बावजूद कही न कही उसे अपने गलती का अहसास होने लगा था। 

 

6 महीने बाद जब पुजा से मिला तो बोला, जो कुछ हुआ उसमे सिर्फ मेरी गलती थी।

मैंने तुम्हारा सारा सपना तोड़ा। कितना खुश थी तुम हमारी शादी के लिए।

और शादी को भी छ महीना बित गया है मैंने तुम्हे बहुत दुःख दिया है ।

 

मै अब तुमको खुश रखने की पूरी कोशिश करूँगा।

पुजा  के चेहरे में शादी के बाद आज पहली बार ख़ुशी नजर आ रही थी।

आज पहली बार अपने प्यार और पति से सामने से बात हुई थी।

साथ ही अपनी गृहस्थी को  सजते देख पा रही थी।

लेकिन  अब भी सूरज के  दिल के किसी कोने में अनाया थी।

जो उसकी आँखों को देख कर पूजा पढ़ सकती थी। 

 

सूरज ने रात के खाने  के टाइम सबको बताया,की कल पूजा को लेकर जायेगा।

सब ने ख़ुशी से कहा ये तो बहुत अच्छी बात है।

पूजा को आज रात भर नींद ही नहीं आई, अपने सपनो का घर को कैसे सजाना है।

इसमें ही रात गुजर गई।

सूरज को नीला रंग बहुत पसंद था,तो पूजा ने परदे से लेकर किचन का हर एक समान नीला रंग का लिया।

सूरज यह सब देख कर  खुश होता था।

और हमेशा एक चीज उसे दिल से लगती की ,पुजा के जितना प्यार वो कभी उससे नही कर पायेगा।

 

घर के बहार छोटा सा गार्डन था, वहां पर भी कुछ नीले रंग वाले फूल पुजा ने लगा दिए थे।

जो भी घर आता तारीफ किये बिना नहीं रह पाता।

इस बीच  अनाया से रोज बाते भी होती पुजा की, लेकिन अब पुजा के मन में अजीब सा डर रहता था।

और जब भी अनाया से बात करती, तो सूरज का जाने का इंतजार करती।

भूल से भी अनाया का नाम अपने मुँह से नहीं लेती थी। 

 

अब दोनों की शादी हुए दो साल बीत  गए थे,जीवन में कुछ खालीपन था।

जो अब भी पुजा को महसूस होता था। उसको अब भी लगता जीवन में अनाया अब भी है।

शाम आज सूरज जल्दी घर आ गया था, आते ही बोला  चलो कही घूमने  चलते है।

तुम आज गुलाबी रंग की ड्रेस पहनना और अपने बाल खुले करना।

 

देखो मै तुम्हारे लिए क्या लाया हूँ , इससे बाल घुंघराले होते है, – क्या तुम, मै जैसे चाहता हूँ वैसे तैयार हो सकती हो।

पुजा की ओर रोलर मशीन और एक गुलाबी रंग का ड्रेस आगे बढ़ाते हुए सूरज बोला…पुजा ने हां तो कहा लेकिन बहुत दुखी हो गई थी।

इतने दिन बाद भी अनाया को सूरज भूल नहीं पाया था। 

 

आज पुजा को न जाने का मन हो रहा था, न सूरज के साथ रहने का।

आज पहली बार गुस्से में बोली आप के ख़ुशी के लिए सब कुछ किया मैंने …

लेकिन अब मै  किसी और की तरह नहीं बन सकती मैं पूजा हूँ, अनाया नहीं सूरज।

आज सूरज के पास कोई उत्तर तो नहीं था।

लेकिन उसको अपनी गलती का अहसास नहीं था।

उसको यह छोटी सी बात लग रही थी और जब पुजा को रोते देखा तो गुस्से में बोला – ऐसा भी क्या करने बोल दिया मैंने कोशिश तो कर रहा हूँ।  

एक अच्छी जिंदगी जीने की… अनाया को मै भूल नहीं पा रहा, तो क्या करू मैं। 

 

पुजा अपने रूम में जाकर आज जी भर कर  रो रही थी, तभी अनाया का कॉल आया पुजा ने अपना मोबाइल गुस्से में दीवार पर जोर से मारा ,मोबाइल टूट गया।

इधर अनाया फ़ोन कर-करके परेशांन हो रही थी।

क्योकि वो पुजा के शहर में ही थी ,पुजा को सरप्राइस  देने वाली थी।

अनाया ने सूरज को कॉल किया ,सूरज  ने जैसे फ़ोन उठाया अनाया ने कहा ,जीजू मै  अनाया, पुजा का कॉल नहीं लग पा रहा  था।

तो आपको कॉल की मैं यही हूँ  घर का एड्रेस दे दीजिये और हाँ  अब पुजा को मत बताना। 

 

जैसे ही अनाया घर पहुंची और डोरबेल बजाया, पुजा बाहर आई और सामने जब अनाया को पाया तो चेहरे की रंगत ही उड़ गई।

अनाया पुजा  से गले लगते हुए बोली मुझे लगा था, तुम बहुत खुश हो जावेगी मुझे यहाँ देख कर, क्या बात है पुजा – जब से तुम्हारी  शादी हुई है तब से मुझे तुम पसंद नहीं करती।

पुजा बिना कुछ बोले अनाया का बैग अंदर लाते हुए बोली बताना था न ऑटो से नहीं आना पढता हम लेने आ जाते।

अनाया ने कहा मै तुम्हे सरप्राइस देना चाहती थी ,वैसे जीजू को बताया था। 

 

पुजा को यह बात बहुत बुरी लगी उसने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा कब से बात होती है -तुम्हारी इनसे,अनाया ने कहा – पहली बार वो भी तुमने फ़ोन नहीं उठाया इसलिए।

पुजा शांत हो गई,और यही सोच रही थी,अनाया का क्या गलती है इसमें।

उसे तो कुछ भी पता नहीं था , सूरज को आवाज देते हुए बोली पुजा ,अनाया आई है बाहर आओ न… लेकिन जो डर था वो साफ झलक रहा था।

पुजा के चेहरे पर ,जैसे ही सूरज बाहर  आया अनाया ने हँसते  हुए कहा

नमस्ते जीजू,और सूरज की नजर जब अनाया पर पड़ी कुछ बोल नहीं पाया और पुजा की नजर सूरज पर थी। 

 

अनाया ,सूरज और पूजा साथ खाना खाते घूमते या कही भी होते ,एक अजीब सी  बेचैनी पुजा के मन में होती कभी-कभी पूजा अनाया को ध्यान से देखती और सोचती काश…मै  अनाया होती।

सूरज को जिसका इंतजार हमेशा से था , वो पास थी। 

लेकिन कुछ बोल ही नहीं पाया अब भी। जब अनाया ने पुजा से कहा कल सुबह मेरी ट्रैन है।

 

यह सुन कर पुजा को बहुत सुकून मिला ,लेकिन रात में खाना खाने के बाद ,अनाया  ने कहा पुजा कुछ देर हम बात कर सकते है।

जब से मै आई हूँ  ठीक से बात ही नहीं हुआ है।

पुजा हाँ बोलती- इससे पहले अनाया बोल पड़ी  कुछ हुआ है पुजा, जो तुम मुझसे छुपा रही हो। 

रात में पुजा और अनाया बहार गार्डन में लगे झुले में बैठे अपने पुरानी बाते याद कर रही थी।

तभी पुजा अनाया के गले लग कर रोने लग गई। अनाया के बार-बार पूछने पर अनाया ने सब कुछ बताया। 

 

दुसरे दिन अनाया वहा से चली तो गई लेकिन अपने आप को वो गुनहगार समझ रही थी ।

उसने कभी नहीं सोचा था ,की अपनी बेस्टफ्रेंड की खुशियों में चिंगारी उसी के कारण लग जाएगी।   

6 thoughts on “गठबंधन (Part-2)

  1. आपका ब्लॉग बहुत ही फायदेमंद है,
    आप ऐसे ही ब्लॉग लिखते रहिए,
    अगर आपको आध्यात्मिक और Motivation ब्लॉग के बारे मै जानकारी चाहिए तो आप मेरे ब्लॉग पर आ सकते हैं।

    Good Content
    Keep it up
    For Motivation Please Visit

    Bhavik_Empire

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