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गठबंधन(PART-1)

गठबंधन(PART-1)

 

 

गठबंधन एक प्रेम कहानी है जो तिन व्यक्तियों से जुडी हुई है, इसका पहला भाग  पढ़ कर आपको कैसा लगा जरुर कमेंट करके बताइयेगा |

 

चलो शुरु करे कहानी का पहला भाग गठबंधन(PART-1)

 

अनाया स्टेज के नीचे  थी ,उसके  घुंघराले बाल आज भी बहुत सुन्दर लग रहे थे।

सूरज को समझ ही नहीं आ रहा था  ,कहाँ पर  गलती हुई है। 

 

 

पुजा और अनाया दोनों बचपन की सहेलियाँ होने के साथ-साथ पड़ोसी भी थी।

हर पल साथ रहना दोनों की आदत हो चुकी थी।  

पुजा और अनाया स्कुल तो साथ में पढ़े ही थे,अब कॉलेज भी साथ में कर रहे थे।

जैसे दोनों सेकण्ड ईयर पहुंचे उनकी एक सहपाठी आरती की शादी तय हो गई। 

आरती का घर बाहर था, तो शादी में जाना तो दोनों के लिए ख्वाब था।

फिर भी सोचा क्यों न घर वालो को  मनाने की कोशिश करे, शायद मान जाये वैसे भी यह पहली शादी है हमारे ग्रुप में।

थोड़ा कोशिश के बाद पुजा और अनाया ने अपने परिवार वालो को मना लिया।

लेकिन थोड़ा अचरच तो दोनों को हुआ मान कैसे गए। 

सुबह पुजा की माँ ने पुछा, आरती की शादी कब है, पूजा ने उत्तर दिया 20 जून को।

माँ ने कहा – अभि  भी जायेगा तुम दोनों के साथ इतनी दुर लड़कियों का अकेला जाना ठीक नहीं।

पूजा ने कहा ठीक है माँ हमको जाने मिल रहा उससे ख़ुशी की और क्या बात हो सकती है। 

जून का महीना अब शुरू भी हो गया और साथ ही पूजा और अनाया की शॉपिंग भी।

शादी के  तीन दिन के लिए दोनों ने बहुत शॉपिंग की और अब वहाँ जाने की ख़ुशी दुगुनी हो चुकी थी। 

दोनों पहली बार इतना दूर साथ जो सफर करने वाली थी। 

18 जून को सुबह ट्रैन से जाना था, और वह दिन भी आ गया। 

पूजा और अनाया की  माँ ने ढेर सारा खाना तैयार कर  दिया  रास्ते के लिए साथ ही ढेर सारा परामर्श भी दिया। 

वहाँ पर  दोनों को क्या करना है और क्या नहीं।

ट्रैन का सफर भी शुरू  हो गया दोनों को बहुत ही अच्छा लग रहा था।

लेकिन अभि बोर हो रहा था और साथ ही यह भी सोच रहा था, ये तीन दिन कैसे बीतेगा। 

सफर ख़तम हुआ और अब पूजा, अनाया और अभि, आरती के घर पहुंच चुके थे।

घर के अंदर घुसते ही आरती की दादी मिली जो बुजुर्ग हो चुकी थी।

दोनों को पहले ध्यान से देखा दादी ने फिर बोली, मै तुम दोनों को पहचान नहीं पा रही।

और ये क्या पहन रखा है लड़को के कपडे… लड़किया सलवार शूट में ही सुन्दर लगती है।

तभी आरती की माँ आई और बोली अम्मा की बातो पर ध्यान मत दो।

आओ अंदर जल्दी से तैयार हो जाओ भूख लग रही होगी।

अनाया और पूजा की आंखे तो आरती को ढूंढ रही थी।

तभी फिर से आरती की माँ ने कहाँ आरती अंदर है बेटा अभी रश्म शुरू हो जायेगा इसलिए वो आराम कर रही है।

खाना खाने के बाद जब आरती से मिली दोनों तो आरती को शरमाते देख पूछाअरेंज है या लव मैरिज…

आरती अब थोड़ा और शरमाते हुए बोली लव मैरिज।

दोनों ने आश्चर्य से कहा सीधी सी लड़की को किसने अपने जाल में फांस लिया। 

आरती ने कहा बुआ के बेटे की शादी में मिली थी, मै और वही से हम दोनों को प्यार हुआ।

अभिनव अपने घर में बड़ा  लड़का है।

अभिनव के घर वालो को जब पता चला तो रिश्ता लेकर आ गए।

पूजा अनाया खुश होते हुए बोले बहुत अच्छा किस्मत है तेरा, जो प्यार और परिवार साथ-साथ  मिल गया। 

शादी की रस्मो को देख कर दोनों अपने लिए सपना सजा रही थी।

और जब आरती दुल्हन बनी उस पर लाल जोड़ा बहुत खिल रहा था।

जिसे देख कर पुजा, अनाया से बोली इस पल का इंतजार शायद हर लड़की करती होगी।

अनाया इस बात पर सिर्फ अपना सर हाँ में हिला दिया।

तभी पीछे से अभि ने आवाज दी, पुजा दी पापा का कॉल आया है।

पूजा बात करने चली गई।

अभी ने कहा अनाया से, दीदी कल सुबह यहाँ से जल्दी निकलना पड़ेगा स्टेशन पर कोई मिलने आने वाला है। 

पुजा ने भी आकर यही बात अनाया से कहा और शादी ख़तम होते ही दोनों अपने -अपने समान समेट कर सोने चली गई।

अनाया को बार-बार करवट बदलते देख, पुजा ने कहाँ क्यों नींद नहीं आ रही।

अनाया ने कहा, हा आरती के विदाई के बाद घर में जो सूनापन छा गया है।

और आंटी-अंकल का मुरझाया चेहरा देख कर अपने माँ-पापा को बहुत मिस कर  रही हु।

पुजा ने कहा ज्यादा मत सोच उदय  है न, तू चली जाएगी तो उदय ख्याल रखेगा अंकल-आंटी का और कल सुबह जल्दी जाना है।

नहीं तो पापा की डाट पड़ जाएगी। 

दुसरे दिन सुबह जैसे ही स्टेशन पहुंचे, पुजा के पापा का कॉल आया और किस जगह पर उन लोग मिलेंगे बताया।

वहाँ पहुंचे तो, एक अंकल हँसते हुए देख रहे थे।

तीनो ने पहले प्रणाम किया, तभी अंकल ने पुछा तुममे से पुजा कौन है।

अभि ने अपनी बहन की तरफ इशारा  किया। 

अभि ने कहा अंकल अब हम चलते है ट्रैन का समय हो गया।

तभी अंकल ने कहा रुको थोड़ी देर सुरज आ रहा है। 

अभी मेरी बात हुई है सूरज से । 

सूरज जैसे आया उसकी नजर अनाया पर थी।

अनाया भी समझ गई थी सूरज उसे देख रहा, इस बीच सूरज के पिता ने  पुजा की तरफ इशारा करते हुए कहा सूरज यह पुजा है।

लेकिन जब दिमाग कही और हो तो वही नजर आता है।

अभी भी सूरज अनाया को देख रहा था। 

ट्रैन भी आ गई, अब तीनो वहाँ से निकले ही थे की पूजा के पापा का फ़ोन आया।

और जैसे ही पूजा ने फ़ोन उठाया पुजा के पिताजी ने कहा मैंने तुम्हे बताना उचित नहीं समझा था।

वो लड़का तुम्हे देखने आया था, और तुम्हे पसंद भी कर लिया है जब घर आवोगी तो बाकि बात करेंगे। 

घर पहुंचते ही पुजा ने गुस्से में कहा आप लोग मेरे लिए लड़का देख रहे है।

और बताना भी उचित नहीं समझा, पुजा के पिताजी ने कहा , सूरज अच्छा लड़का है।

सूरज के पिता जी, मेरे बचपन के दोस्त है।

पुजा कुछ बोले बिना ही अंदर चली गई लेकिन जब अनाया ने कहा – लड़का दिखने से लेकर सब कुछ में अच्छा है।

कोन सा तेरी शादी अभी हो रही अंकल बोल तो रहे है पढाई ख़तम होने के बाद करेंगे। 

पुजा ने अब हाँ कर दी, लेकिन अब पुजा को कभी-कभी सूरज से बात करने का मन होता था।

पुजा के पास एक की-पैड मोबाइल था।

करीबन तीन महीने बाद सूरज का मामा का लड़का बिज़नेस के काम से पुजा के शहर आया।

तो पुजा के पिता ने जिद करके उसे अपने घर ले कर आये।

और सबको अंकित से मिलवाते हुए बोले दो दिन के लिए अंकित यहाँ पर आया है, और दो दिन हमारे साथ रहेगा।  

दूसरे दिन, पुजा जैसे ही कॉलेज के लिए निकली, पीछे से आकर सूरज के भाई ने एक पर्ची दिया।

और कहा सूरज ने देने बोला था। पर्ची को जैसे ही खोला एक मोबाइल नंबर था।

थोड़ा हिम्मत करके शाम में कॉल किया जैसे ही सूरज ने फ़ोन उठा कर हेलो कहा।

पुजा की दिल की धड़कन बढ़ गई और कुछ बोल ही नहीं पाई। 

दुसरे दिन फिर उसी नंबर से पुजा के मोबाइल पर कॉल आया अभी साथ में अनाया थी। पुजा शरमाते हुए बोली ये सूरज का नंबर है।

अनाया ने कहा जल्दी से फ़ोन उठा न मै भी तो सुनु स्मार्ट जीजू का आवाज… 

पुजा ने जैसे फ़ोन उठाया ,सूरज ने कहा मुझे पता है अब भी शर्मा रही हो तुम, मेरे से बात करने में मै उसी  दिन देख के समझ गया था।

बहुत सीधी और शर्मीली लड़की हो, इसी वजह से पहली नजर में दिल दे बैठा। 

लेकिन मै जानना चाहता हूँ, मै तुम्हे पसंद हूँ  की नहीं। 

पुजा ने झट से कहा हाँ पसंद हो, फिर से सूरज ने कहा तो कब बारात ले के आउ…

इस बात पर पूजा बोली दो साल बाद…

फिर से सूरज ने कहा इतना लम्बा क्यों, पढ़ना तो यहाँ भी हो जायेगा। 

अब दोनों की बाते हर रोज होने लगी दोनों एक-दूसरे की पसंद न पसंद सब कुछ जान चुके थे।

पुजा के पापा ने जब पुजा से कहा क्या इसी साल शादी कर दे।

सूरज के पिताजी जी का फ़ोन आया था।

आगे की पढाई तुम वहां कर सकती हो….

अगर तुम हा  कहो तो अगले महीने की पहली तारीख को सगाई कर दे। 

पुजा ने इस बार तुरंत हा  कर दी, और जैसे ही पूजा के पिताजी ने, सूरज के पिताजी को कॉल किया उधर से आवाज आया…

मैं आपको ही कॉल करने वाला था।

क्यों न शादी और सगाई साथ-साथ कर ले, दुरी बहुत है और रिश्तेदार  भी यही चाह रहे, अब आप बताओ। 

अगले महीने दिसम्बर में सूरज और पुजा की शादी तय हुई।

अब पूजा और अनाया दोनों शॉपिंग में लग गई थी। अपनी प्रिय सहेली का जो शादी था।

अनाया कोई कमी नहीं चाहती थी, सारा काम अनाया  मन लगा कर रही थी।  

सूरज भी तैयारी में लग गया था।

और कब शादी का दिन आ गया।

दोनों को पता ही नहीं चला, शादी के एक दिन पहले ही सारे मेहमान, जहां  शादी होना था।

वहां पर पहुँच  गए।

शाम में जब पुजा को कॉल किया और सूरज ने कहा…

 

मै  तुम्हारे शहर पहुँच  चुका हु, तो पूजा की दिल की थड़कन बढ़ गई।

और इतना कह पाई – पहली बार नजदीक से बात हो रही है।

कल जब मै दुल्हन बनुगी… सबसे पहले आपको कॉल करुँगी। 

और दूसरे दिन तैयार होकर जब अपने आप को दर्पण में देखते हुये।

अनाया से पूछी मै  कैसी लग रही हु…. अनाया ने कहा यह कोई पूछने वाली बात है।

आज तो सबकी नजर तुम पर ही होगी और जीजू का क्या हाल होगा।

यह सोच रही मै ….बोल के अनाया हॅसने लगी। 

पूजा ने जैसे ही सूरज को कॉल किया सूरज ने कहा, मै तुम्हारा ही कॉल का इंतजार कर  रहा था।

क्या मेरी दुल्हन तैयार हो गई।

उस दिन के बाद आज तुम्हे देखने का मौका मिलेगा… कितनी खूबसूरत लग रही थी।

उस दिन तुम…तुम्हारे  कर्ली बाल बहुत पसंद आया था।

मुझे,और भी बहुत कुछ सूरज बोल रहा था। 

लेकिन पूजा के आँखों से आँशु बह रहे थे।

आज उसे पता चला था, सूरज अनाया को पूजा समझ बैठा था।

अब कैसे बताये यह समझ आता इसके पहले पुजा  की बुआ अंदर आई।

और फ़ोन छीन कर बोली चलो अब मंडप में ही बात करना और हँसने लगी। 

अनाया ने पुजा से जानना तो चाहा क्या हुआ, पर न पूछने का मौका मिला न बताने का।

लेकिन अब अनाया का साथ चलना पुजा को अच्छा नहीं  लग रहा था। 

जैसे ही स्टेज में दोनों तरफ से दूल्हा और दुल्हन की एंट्री हुई।

सूरज ने जैसे पुजा को देखा उसकी आंखे फटी की फटी रह गई।

जिस लड़की से उसे प्यार हुआ था उसे सूरज की आंखे बेचैनी से ढूंढने लगी। 

अनाया स्टेज के निचे थी ,उसके  घुंघराले बाल आज भी बहुत सुन्दर लग रहे थे।

सूरज को समझ ही नहीं आ रहा था, कहाँ पर गलती हुई है। 

पुजा के पास जैसे पंहुचा बस इतना बोल पाया ” दिल में कोई और था पर जुबान में तुम थी “।

और पूजा की आंखे बता रही थी उसका दर्द क्या था। लेकिन अब क्या……

         “यह कैसा गठबंधन है हमारा ” यही सोच रही थी बस… 

 

 

 

to be continued

 

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