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जिन्दगी का सफ़र

 

जिन्दगी का सफ़र(PART-1)

 

एक पुरी इच्छा की अधुरी कहानी ….

 

 

यह कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने जीवन में वो पाया जो उसे चाहिए था, लेकिन भाग्य कहे या दुर्घटना

इसके आगे किसकी चलती है।

चलो शुरू करते है प्रेमा की कहानी जिन्दगी का सफ़रइस कहानी का उदेश्य किसी भी तरह की सामाजिक

कुरीतियों को बढावा देना बिलकुल भी नहीं है ।

 

फिर चौथा बच्चा लड़की हुई तो क्या करेगी ….कुछ सोचा है प्रेमा ?

प्रेमा ने उत्तर दिया मैडम भगवान भरोसे सब पल जायेंगे लेकिन इस बार देखना जरुर लड़का ही होगा |

 

 

SAFAR

 

 

निकिता  25 साल की अविवाहित लड़की जिसकी अभी नई – नई यहाँ  पोस्टिंग हुई थी । 

यह गांव निकिता के लिए नया था ,  यहाँ के लोग , रहन -सहन  सब देख कर निकिता सोच रही थी।

यहाँ वह कैसे रह पायेगी, वह अकेले ऊपर से  जंगल  इलाका… 

शहर जाने के लिए एक राज्य परिवहन का बस जिसमे सफर करने के बाद चार दिन तक महसुस होता की अभी भी वह

बस में ही है। 

 

 

जैसे ही गांव के उस घर में पहुंची आस-पास के रहने वाले लोग बिना बुलाये ही मदद के लिए आ पहुंचे। 

 

सामान तो था नहीं केवल आवशयकता की वस्तुए तो घर जल्दी ही रहने लायक बन गया, पानी सबको अपने

आवशयकता अनुसार हैंडपंप से लाना पढता था। 

 

जो निकिता को थोड़ा कठिन लग रहा था , उसने तुरंत ही एक  घर का काम करने के लिए  लड़की तलाश लिया। 

 

प्रेमा जो निकिता के घर के पास ही रहती थी , चार कदम की दुरी पर ही था।

प्रेमा का घर…   सुबह से ही पहुँच  जाती काम करने। 

 

निकिता उससे हमेशा  बोलती थी, बहुत जल्दी आ जाती हो प्रेमा , जो की अभी 20 वर्ष अविवाहित थी।

 

प्रेमा हस्ते हुए  बोलती मैडम और भी घर के काम होते है , इसलिए सुबह जल्दी आना पड़ता है |

 

प्रेमा सुन्दर और चंचल थी, काम में भी निपुण थी… 

जब भी शाम के समय अपने काम से खाली होती तो निकिता के पास आ जाती |

 

 

 

निकिता के घर के पास ही प्रेमा और उसका परिवार रहता था, कभी – कभी प्रेमा की माँ भी आ जाती थी |

एक दिन बात करते करते पता चला की वह उसकी सौतेली माँ है, लेकिन दोनों को देखकर कभी लगता नहीं था …

दोनों में प्यार बहुत था |

 

प्रेमा की माँ ने बताया , पास में ही एक लड़का जिसके माता –पिता दोनों का देहान्त हो गया है।

उसी से प्रेमा का रिश्ता तय हुआ है |

शादी के बाद प्रेमा और उसका पति यहीं रहेंगे , पास ही में एक छोटा सा जमीन है ही उसके लिए घर बना देंगे |

 

वहां पर  आस –पास और प्रेमा का घर भी मिटटी का बना था, छत खप्पर का होता है ।

घर की दीवार पर मिटटी से ही घर पर सुन्दर –सुन्दर आकृतिया बना रहता था और घर का आँगन गोबर से लिपा

हुआ रहता |

 

उसमे भी हाथ से डिजाईन बनाते थे, घर भी बहुत छोटा था केवल दो कमरों और एक छोटा सा रसोई, आँगन में कुछ

फूलो के पौधे सभी घरो में लगे हुए रहते थे जो की उस घर की खूबसूरती बड़ा देता था |

 

सभी सुकून से रहते थे, किसी को किसी चीज की शिकायत नहीं थी |

 

अगले साल भी आ गया निकिता का एक साल कैसे बीता  पता ही नहीं चला और प्रेमा का विवाह भी हो गया और अब भी

प्रेमा निकिता के यहाँ कम करने आती है |

 

बस पहले से अब सज-सवर का आती थी अब कैसे भी आ जाती थी, पूछने पर बस हंस दिया करती थी शायद काम का

बोझ बड गया था |

 

प्रेमा अब घरो के काम के साथ बहार खेतो में भी काम में जाया करती थी |

साल भर के होते –होते प्रेमा माँ बनने वाली थी वह बहुत खुश रहती थी और हमेशा कहती भगवान मुझे बेटा दे- देना |

 

प्रेमा का पति कभी –कभी प्रेमा को बुलाने आता तो कभी उसे नाम से न पुकार कर, पगली बोलता था जो निकिता को

थोडा अजीब लगता था |

एक दिन निकिता ने उसके पति से पूछ ही लिया – आप प्रेमा को पगली क्यों बोलते हो ?

तो वह बोला इसको कुछ आता ही कहाँ है |

 

निकिता कुछ बोली नहीं पर सोच रही थी, सारा काम तो बहुत अच्छे से सम्हाल लेती है  और घर चलने में बराबर

जिम्मेदारी से काम करती है।

अभी माँ बनने वाली है फिर भी इतना काम तो करती है |

 

देखते – देखते नौ महीने भी बीत गए और प्रेमा को प्रसव पीड़ा भी शुरू हो गया ।

गाँव छोटा था पास ही सरकारी अस्पताल था, जहाँ निकिता ने प्रेमा को जाने की सलाह दी वहां उसने लड़की को जन्म

दिया।

 

जैसे ही यह बात निकिता को पता चला की प्रेमा की लड़की हुई है वह तुरंत ही अस्पताल पहुच गयी |

 

वहां पर प्रेमा को देखकर आश्चर्य में पड़ गयी निकिता, प्रेमा बच्चे को देखकर बाते कर रही थी हंस रही थी।

निकिता ने कहा तुम्हे तो लड़का चाहिए था ना।

 

प्रेमा ने कहा भगवान ने चाहा तो दूसरी संतान लड़का हो जायेगा, निकिता ने अब उसके पति को देखा उसे भी कोई

ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था |

 

थोड़े दिन बाद प्रेमा फिर से काम में आने लगी और साथ में अपने बेटी को लाती उसे सुलाकर सारा काम ख़त्म कर चली

जाती |

 

समय पंख लगाकर उड़ गया, प्रेमा की बेटी दो साल की हो गयी थी और प्रेमा फिर से माँ बनने वाली थी।

निकिता ने प्रेमा को कहाँ – इतना गरीबी है की बिना कमाए एक दिन घर नहीं चलता तुम्हारा… 

और इतना जल्दी दूसरा बच्चा रखना का क्या सही है प्रेमा ?

ऊपर से तुम कमजोर भी हो गयी हो।

 

प्रेमा ने हंस कर कहाँ मैडम बिटिया तो पराये घर चली जाती हैं, बेटे अपने होते है बुढ़ापे का सहारा बनते है।

निकिता ने कुछ नहीं कहाँ और प्रेमा अपने कम में लग गयी |

 

समय कैसे निकलता है, कहाँ किसी को पता चलता है।

प्रेमा ने इस बार फिर से लड़की को जन्म दिया , लेकिन इस बार थोड़ी उदास लग रही थी , लेकिन दुखी भी नहीं थी |

 

तीसरे संतान की उम्मीद उन दोनों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी जो की बेटे की चाहत थी |

निकिता बाहर घूम रही थी की प्रेमा की बेटी की रोने की आवाज सुनकर वह उसके घर चली गयी ।

निकिता पहली  बार प्रेमा के घर गयी थी, उसने घर को देखा एक चारपाई बहार रखी हुई थी।

उसमे उसका पति लेटा हुआ था।

 

एक बरामदा छोटा सा फिर उससे थोडा बड़ा कमरा जिसमे एक तरफ  रसोई और कुछ बिछोना और कुछ कपडे अस्त

–व्यस्त पड़े थे, दो –चार बर्तन और एक मिटटी का घड़ा |

 

बरसात होने के कारण और मिटटी घर होने के कारण अन्दर भी नमी थी और घर के बाहर कीचड था।

घर के बाहर प्रेमा ने कद्दू और लौकी के नार लगा रखे थे, जो उसके घर के खप्पर में पहुच चुके थे |

 

यह सब देखकर निकिता को थोडा दुःख हुआ न ही सोने का बिस्तर , ना ही खाने का राशन , और ना ही कपडे जो मुख्य

आवश्यकता होती है, मनुष्य की वाही नहीं है, ऊपर से दो बच्चे |

 

थोड़ी देर बाद निकिता ने बड़ी बच्ची का रोने का कारण पूछा |

 

प्रेमा ने कहाँ – इसे  भूख लग रही थी मैडम आज खाना नहीं बना था , राशन नहीं है |

निकिता ने कहाँ चलो मेरे साथ कुछ राशन दिला देती हूँ |

 

ये तो रोज होता है मैडम, मै कितने दिन तक आपसे लुंगी, नहीं रहने दीजिये मैडम… 

अभी के लिए आप बस कुछ खाने का बेटी को दे दो |

 

निकिता जाने लगी तो प्रेमा ने कहाँ मैडम पहली बार आई हो मेरे घर का चाय पी लीजिये।

 मना करना चाहा इतने में प्रेमा बोली – गरीब का घर का चाय कहाँ पीयोगी |

निकिता रुक गयी प्रेमा ने चूल्हा जलाया गीली लकड़ी होने के कारण धुंआ बहुत हो रहा था, जो पुरे कमरे में भर गया था |

 

वहीं जमीन पर बच्ची सोई हुई थी, यह सब देखकर निकिता उदास हो गयी थी |

 

लेकिन प्रेमा  इतनी गरीबी के होते हुए भी स्वभीमानी थी।

आदर सत्कार करना भी जानती थी, चाय बनाने के लिए उसने एक बर्तन में पानी डाला।

कागज की पोटली से शक्कर निकल कर उसने 2 – 4  चम्मच ही डाले होंगे, दुसरे पोटली से चायपत्ती निकल कर डाल

दी। 

 

थोड़ी देर में एक स्टील के गिलास में चाय डाल कर दिया… 

 

निकिता को इतनी फीकी चाय भी बहुत मीठी लग रही थी |

 

घर पहुची तो नीता ने अपने आप से सवाल किया मेरे पास जरुरत से ज्यादा सब कुछ है।

 

लेकिन प्रेमा के जैसा – कभी हंस कर किसी ने बात क्यों नहीं कर पाती।

शायद संतोष सबको पास नहीं होता है |

 

अब प्रेमा तीन बेटियों की माँ बन चुकी थी एक कमरे में सभी रहते थे।

जब ठण्ड आती तो रात में अंगेठी चला कर सभी सो जाते थे

सभी के लिए पर्याप्त चादर तो था नहीं… 

कभी –कभी रात भर जागते और बच्चो की रोने की आवाजे आते रहती थी |

 

चौथी बार प्रेमा माँ बनने वाली थी।

इस बार फिर से निकिता ने कहा तुम बच्चो को न ठीक से खाना दे पति हो ना पढ़ा पा रही हो।

हालाकि सरकारी स्कूल में  भर्ती करा दिया था, लेकिन  बच्चे  कभी स्कूल जाते तो कभी नहीं जाते |

 

फिर चौथा बच्चा लड़की हुई तो क्या करेगी ….कुछ सोचा है प्रेमा ?

प्रेमा ने उत्तर दिया मैडम भगवान भरोसे सब पल जायेंगे लेकिन इस बार देखना जरुर लड़का ही होगा |

 

प्रेमा काम  पर आती ही थी…  सातवा महिना चल रहा था।

एक दिन प्रेमा को निकिता के घर में कम करते हुए असहनीय दर्द हुआ।

निकिता प्रेमा को लेकर हॉस्पिटल पहुंची |

 

डॉक्टर ने कहा प्रसव पीड़ा चालू हो गया है… कभी – कभी 7 माह में बच्चे हो जाते है ।

करीबन तीन घंटे बाद प्रेमा ने लड़के को जन्म दिया…  बच्चा बहुत कमजोर था ।

और लगातार माँ बनने व अच्चा-खाना नहीं मिलने के कारन प्रेमा भी कमजोर हो गई थी |

 

प्रेमा का पति भी बहुत खुश था लड़का जो हुआ था …..

लेकिन इस बार इक  नयी विपत्ति इंतजार कर रही थी… प्रेमा का |

 

                                                                       To be continued….

 

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