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जिन्दगी का सफ़र

जिन्दगी का सफ़र(PART-2)

 

जिन्दगी का सफ़र…  एक पुरी इच्छा की अधुरी कहानी 

 

 

जिन्दगी का सफ़र.यह कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने जीवन में वो पाया जो

उसे चाहिए था। लेकिन भाग्य कहे या दुर्घटना, इसके आगे किसकी चलती है

 

चलो शुरू करते है प्रेमा की कहानी अगला भाग … इस कहानी का उदेश्य

किसी भी तरह की सामाजिक कुरीतियों को बढावा देना बिलकुल भी नहीं है ।

 

प्रेमा का जिंदगी सफ़र याद आ जाता  निकिता को …..कहा से शुरू किया था…..

और कहा पर आ गई है।

 

सफ़र

 

प्रेमा के जीवन में बेटे का आगमन तो हो गया था लेकिन अब प्रेमा कमजोर हो चुकी थी |

लेकिन काम का बोझ तो हमेशा से था जब से होश संभाला था सो आज भी था…….तो काम तो

करना ही था प्रेमा को |

 

अब निकिता को बच्चो की रोने की आवाज ज्यादा सुनाई देती थी….

छोटा बच्चा अभी सिर्फ एक सप्ताह का हुआ होगा और प्रेमा हेंडपंप से पानी लेने आया करती

थी |

कभी-कभी निकिता को प्रेमा पर गुस्सा तो बहुत आता लेकिन कुछ बोल नहीं पति |

निकिता ने एक दिन हेंडपंप के पास जाकर प्रेमा को रोका और पूछा सब ठीक है न… बच्चो

की रोने की आवाज बहुत आती है |

 

प्रेमा बड़े उदाश होकर बोली अब कमाने वाला एक ही हो गया है, बच्चो को खाना नहीं मिल

पा रहा और छोटे बेटे को दूध नहीं मिल पा रहा

 

निकिता ने कहा छोटे को दूध क्यों नहीं मिल पा रहा ?????

प्रेमा बोली मै कमजोर हो गई हु मैडम …

 

निकिता बोली अच्छा यह बात तुमको अब जा कर पता चल रही है, बच्चो को न अच्छा खाना न

शिक्षा दे पा रही, फिर भी लड़के की चाहत के लिए चार बच्चे रख लिए ….

 

और प्रेमा का जवाब हमेशा की तरह था…. सब पल जायेगे मैडम, भगवन सबके लिए एक

सामान है |

 

 

निकिता ने लम्बी सास लेते हुए कहा मेरे घर से दूध ले लो |

प्रेमा जो हर बार न कह दिया करती थी…. इस बार झट से हा कह कर निकिता के पीछे-पीछे

चल दी ….

 

निकिता सोच रही थी माँ आखिर माँ होती है…. प्रेमा ने दूध लिया और घर जाकर अपने छोटे

बेटे को पिलाया |

बच्चे की रोने की आवाज आज निकिता को सुनाई  नहीं दी…. जो सुकुन दे रहा था निकिता

को |

 

लेकिन प्रेमा की मुश्किल कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी, आर्थिक स्थिति और भी ख़राब

जो गई थी |

 

बेटा एक माह का भी नहीं हो पाया और प्रेमा काम करने लग गई ….

निकिता को कभी प्रेमा पर गुस्सा आता तो कभी दुःख होता था |

 

प्रेमा काम पर अपने बेटे को साथ लेकर आती थी , उसे अपने बेटे से प्यार बहुत था …. काम

के बीच-बीच में बेटे को गोद में उठा कर प्यार करना नहीं भूलती थी |

 

प्रेमा का पति अब छोटी बेटी को गोद में लेकर आता जो अभी दो ढाई साल की थी |

निकिता रात का बचा खाना या सुबह का नास्ता प्रेमा  को दिया करती तो प्रेमा कभी नहीं खाती

उसे अपने बच्चो और पति को बुला कर खिला दिया करती थी |

 

समय बुरा हो या अच्छा बित  ही जाता है ……

और प्रेमा का बुरा समय भी बीत गया …..

 

बेटिया भी अब सब के घरो में काम करने लगी, और  प्रेमा अब खेतो में काम करने जाया

करती |

अब खाने(आर्थिक रूप से) की परेशानी ख़त्म हो गई थी|

 

बेटा पढाई में अच्छा निकला …. रोज स्कूल जाता और कभी मिल जाये तो बड़ी अदब से बात

करता …

 

प्रेमा की बड़ी बेटी 16 साल की हो गई और प्रेमा ने निकिता के लाख मना करने के बावजूद

बेटी के दुगुने उम्र के लड़के से बयाह दिया |

कम उम्र में ही एक-एक करके बेटियों का विवाह कर दिया …..

 

सभी बेटियों का ससुराल अस-पास के गाव में था, तो हप्ते में बेटिया आ जाया करती थी |

कभी निकिता से मिलती तो खुश होकर प्रणाम जरुर करती …. कम उम्र के कारण साड़ी में

गुडिया की तरह लगती थी, प्रेमा की बेटिया|

 

प्रेमा की भी इसी उम्र में शादी  हो गई थी, वो भी कितनी सुन्दर लगती थी ….. लेकिन फर्क

उम्र के साथ-साथ अमीरी और गरीबी का भी होता है |

लेकिन प्रेमा का बेटा होनहार निकला बारहवी की परीक्षा पास कर ली थी |

प्रेमा को गर्व था बहुत, अपने बेटे पर …. चहरे की चमक प्रेमा की बढ़ गई थी |

 

बेटा भी माँ से प्यार बहुत करता हमेशा कहता… मै काम जल्द शुरू करुगा और आपको

काम नहीं करना पड़ेगा |

 

प्रेमा बहुत खुश थी अपने पुराने दिनों के दुःख को अब भूल चुकी थी |

बेटा अब काम करने लगा था , अब कच्चा माकन दो कमरों का पक्का हो चूका था …

 

साथ ही दो-चार गाय भी ले लिए थे जो घर के पीछे बंधा होता था …. प्रेमा को देख कर निकिता

सोच में पड़ जाती |

प्रेमा गलत थी या निकिता ???

 

एक शाम  प्रेमा भागते-भागते रोते हुए आई और कहने लगी मैडम मेरे खुशियों को न जाने

किसकी नजर लग गई है |

 

निकिता बोली पहले आराम से बैठ जाओ अब बताओ क्या हुआ है …

प्रेमा बोली मैडम बड़ी बेटी को बेटा हुआ था, कल रात को वो नहीं रहा ….और प्रेमा जोर-जोर

से रोने लगी |

 

निकिता के पास कुछ शब्द तो नहीं थे, लेकिन धीरे से कहा नियति के आगे किसकी चलती है

…. बेटी को अभी तुम्हारी जरुरत है |

 

कुछ दिनों के लिए बुला लाओ ……

प्रेमा बोली ठीक है, मैडम लेकिन उसका पति उसे कहा आने देगा रहने को….

 

निकिता चुप थी इसका जवाब तो कोई भी नहीं दे सकता क्योकि शादी के बाद बेटी पर

अधिकार कहा रह जाता है … माता-पिता का |

 

इस बात कुछ दिन ही बीते होंगे की प्रेमा की जोर-जोर से रोने की आवाज ने निकिता के कदम

प्रेमा के घर के तरफ मोड़ दिया ….

 

वहा पर निकिता ने जो देखा उसे अन्दर तक हिला कर रख दिया …

प्रेमा बेटे के मृत शारीर के सामने रोये जा रही थी … आस-पास बैठे लोग कह रहे थे बहुत

दिनों से तबियत ख़राब चल रहा था बेटे का ..

प्रेमा का पति जब निकिता को देखा, तो निकिता को बोला…… बेटा नहीं रहा

मैडम।।।

 

निकिता को वो पल याद आने लगा जब प्रेमा ने बड़ी मुश्किल से बेटे की परवरिश की थी |

भगवन भी कितना निर्दई हो गया है, अगर वापस लेना ही था, तो इतना लम्बा तपस्या क्यों

कराया …..

 

बेटे के जाने के बाद प्रेमा पागल सी हो गई थी, जो रास्ते में दीखता सबसे कहती मेरा बेटा नहीं

रहा |

 

अब प्रेमा अस्त-व्यस्त कपड़ो में कही भी बैठे रहती … कभी हस्ती तो कभी रोती …..

 

उसकी दसा देख कर निकिता का दिल बैठ जाता था, लेकिन प्रेमा को कुछ भी कहो उसे अब

समझ नहीं थी |

 

अब प्रेमा सिर्फ निकिता से एक ही बात बोला करती, मैडम मेरा बेटा नहीं रहा …..

निकिता कुछ जवाब नहीं दे पति थी |

प्रेमा का जिंदगी सफ़र याद आ जाता  निकिता को …..कहा से शुरू किया था और कहा पर आ गई है |

 

पुरी इच्छा की अधुरी कहानी ……प्रेमा की |

 

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