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कविता (पार्ट-1)

कविता

जो पति रोज कहता था, की पिछली रात जो कुछ भी होता है

मुझे सुबह याद नहीं रहता….

और हर सुबह कविता यह बात मान जाया करती था । 

कविता …एक छोटे से कस्बे में रहने वाली 24 साल की सीधी – साधी लड़की, सिलाई कढ़ाई में दक्ष, घर के सारे काम में निपुण।

लेकिन भारतीय समाज में पढाई भी बहुत महत्त्वपुर्ण स्थान रखता है।

आपके पास कोई टैलेंट हो न हो पर डिग्री होना चाहिए।

इसी के आधार पर आपको इज्जत और पैसा मिलेगा।

कम से कम शुरुवाती दौर में ये सब बहुत मायने रखता है।

लेकिन कविता थोड़ी पढाई में कमजोर थी, 5 वी तक पढ़ी थी।

आगे जिम्मेदारियों ने, ना पढ़ने दिया और ना ही बचपना जीने दिया।

4 बहनो  में सबसे बढ़ी थी और सबसे कम पढ़ी लिखी।

लेकिन सबसे सुन्दर और सीखने में सबसे तेज थी।

उसके माता-पिता को हमेशा यही लगता की इससे शादी कौन करेगा, क्योकि समाज में आजकल पढ़ी लिखी लड़कियों को ही अच्छा वर मिलता है।

यह सब कहते सुनते कविता कब 24 साल की हो गयी पता ही नहीं चला। 

कविता कपडे सीलती है ,घर चलाने में अपने पिताजी की पूरी मदद करती है।

बहनो की शादी में भी उसने अपने पिताजी की आर्थिक आधार पर बहुत मदद की। एक बेटे की ही जिम्मेदारी निभा रही थी।

अब कविता और उसकी छोटी बहन का शादी होना बाकी था।

छोटी बहन पढ़ी लिखी थी, अच्छे-अच्छे रिश्ते आने लगे और एक नौकरीपेशा  लड़के से  उसकी शादी तय हो गयी।

कविता के लिए एक ही रिश्ता आया और  उसके माता-पिता ने ज्यादा सोचा नहीं बस हा  कर दी।

और कविता से पूछना तक सही नहीं समझा।

उसके माता पिता ने पहले ही सोच लिया था, की कविता को अच्छा परिवार व लड़का मिलना मुश्किल है।

कविता माता -पिता की ख़ुशी  में ही अपना ख़ुशी देखती थी।

 

दोनों बहनो की एक ही मंडप पर शादी हो गयी, दोनों ख़ुशी-ख़ुशी दुल्हन बनकर सपने पलको मे लिए और मधुर अरमानो के साथ ससुराल पहुंच गयी। 

शुरुवात में दोनों का सब कुछ बहुत अच्छा था।

कविता और उसकी बहन पगफेरा में पर घर आई।

सबने उससे जानना चाहा उसका ससुराल कैसा है, लोग कैसे है, सास-ससुर कैसे है। 

उन दोनों ने बहुत तारीफ की छोटी बहन का पति बाहर नौकरी करता है।

तो वह पगफेरा के बाद दिल्ली चली जाएगी और इधर कविता अपने ससुराल में सास-ससुर, देवर, ननद, पति  साथ रहने लगी।

कविता का पति भी 8 वी  पास था और खेती-बाड़ी करता था ।

उसी के काम में कविता भी हाथ बटाती। 

शुरू में तो सब सही ही होता है, थोड़े दिन बाद…

एक दिन  शाम को कविता का पति काम  से आया तो कविता पानी लेकर पहुंची तो देखा की वह नशे में था।

कविता के हाथो से पानी का गिलास लेकर दूर फेंक  दिया।

और कविता को चिल्लाने, मारने लगा, कविता रोते  हुए सास के पास गई पर सास अपने बेटे को ना बोल के उसी को समझाने लगी।

शायद बेटे के बारे में पहले से ही पता हो, बस मारने वाली बात  नई थी।

फिर तो वह अब रोज होने लगा, इतना सब कुछ कविता अकेले सहती थी

किसी को कुछ नहीं बताया, ना ही बहनो को न ही माता-पिता को।

अब शादी को लगभग एक साल होने को आया, कविता माँ बनने वाली थी।

अभी तीसरा महीना चल रहा था, उसके पति रोहन का रवैया वैसा ही था।

एक दिन शाम को नशे में रोहन आया, आते  ही उसने कविता के ऊपर कैरोसिन डाल दिया, माचिस जलाने ही वाला था की कविता ने अपने पति धक्का दिया और  थप्पड़ मारा।

पुरे परिवार वाले अब वहां इकठ्ठा हो गए थे।

सबने कविता को बहुत भला-बुरा कहा, कविता को सभी बोल रहे थे की भारतीय नारी अपने  पति पर हाथ नहीं उठाती।

तब कविता ने कहा मेरे साथ यह सब रोज होता है, उसे कब तक मै सहुँ,  आज मारने ही वाला था… आपका बेटा।

मैंने हाथ उठाया तो गलत हो गया। 

जैसा रोज शाम गुजरता है, गुजर गया। 

जो पति रोज कहता था, की पिछली रात जो कुछ भी होता है।

मुझे सुबह याद  नहीं रहता, हर सुबह कविता यह बात मान जाया करती थी।

लेकिन आज रोहन को कल की पूरी बात याद थी।

कविता का थप्पड़ उसके अहम को लगी थी, सुबह से घर का माहौल तनाव पूर्ण था।

कविता का एक थप्पड़ किसी को रास नहीं आ रहा था।

और रोहन ने सब के सामने तलाक देने का इरादा स्पष्ट कर दिया था। कविता को थोड़ा धक्का लगा, लेकिन उसने  अगले ही पल कहा मै तलाक नहीं दूंगी।

रोहन का फैसला नहीं बदला और उसे मायके जाने का बोल कर वहां से चला  गया । 

कविता मायके चली गई और रास्ते भर सोचती रही। 

क्या उसने गलत किया है… 

(पर्ट-2 के लिए…..part-2 को क्लिक करे ।_)

to be continuted

       

 

 

 

 

                 

 

 

 

 

 

 

                   

 

 

                                                                           

 

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