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कुकर

कुकर

                       

सबका एक पसंदीदा सीरियल भी होता है

और उस समय लाइट चली जाये तो अगले दिन दुःख का सैलाब उमड़ पड़ता

मानो जीवन का अहम हिस्सा ही छूट गया हो। 

kukar

गांव की खूबसूरती देखते ही बनती है, खेत खलिहान हरे-हरे पेड़-पौधे, चिडीयो का चहकना

और इन सब के बीच भोले-भाले लोग। 

गांव में सभी एक-दूसरे को पहचनाते है और सुख-दुःख में शामिल होते है।

मिलकर रहते है और जरूरत पढ़ने पर एक- दूसरे का सहयोग करते है, और गांव  के लोगो की  जरुरत भी कम होती  है।

कम में भी संतुष्ट रहते है लोग  यह ग्रामीण जीवन में  स्वाभाविक भी है। 


गांव के औरते, बच्चे के  स्कूल और पति के काम पर चले जाने के बाद एक जगह इकठ्ठा होकर स्वेटर, कुरुशिया बुनती है।

और बाते  करते रहती है |

कभी टीवी सीरियल के बारे में बात तो कभी आज कौन सा सब्जी बनाये हो या कैसे बनाया जाता है।

इसको लेकर गहन चिंतन-मनन होता है ।

सबका एक पसंदीदा सीरियल भी होता है, और उस समय लाइट चली जाये तो अगले दिन दुःख का सैलाब उमड़ पड़ता

मानो जीवन का अहम हिस्सा ही छूट गया हो, और अगर उस सीरियल में कोई मर जाये

तो आंशुओ की धारा  बहती और इतना दुःख होता जैसे घर का कोई सदस्य ही चला गया हो।

अधिकतर कपड़ो और ज्वेलरी की बाते हुआ करती।

बस इन औरतो की जिंदगी में सुबह, शाम  ऐसे ही निकल  जाया करती।


लगभग सभी के घर चूल्हा हुआ करता, जिसमे से निकलाता धुआँ यह बताता की अब घरो में खाना बनाने का समय हो गया है।

सभी घरो में पारम्परिक बर्तन ही प्रयोग करते।

लेकिन अब उनमे एक नया  मेहमान जुड़ गया था। 

जो था छोटू-मोटू मास्टर …कुकर

एल्युमिनियम का कुकर… इस कुकर को महिलाये पहली बार उपयोग करके बहुत खुश हो रही थी।

क्योकि अब दाल-चावल बनाना आसान था, जो दाल पीतल के बर्तन में बनाया जाता वो अब कुकर में बन रहा है

सिर्फ कुछ  सीटी में भोजन तैयार…समय का बचत भी, घर मे सभी खुश थे।

और अब कुकर के आने से उन लोगो के पास बात करने का समय ज्यादा होता और खाने बनाने के बारे में बहुत बाते होती।

कुकर आने के बाद मानो ग्रामीण औरतो की लाइफ में नया चमत्कार हुआ हो। 

अब रोज सबके घर के सीटी की आवाज आने लगी।

अब बातो में  टीवी, सीरियल, कपडे, ज्वेलरी के साथ कुकर का जिक्र भी होने लगा…

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