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मै बन गया हूँ मैडम…

मै बन गया

यहाँ हर महीने बच्चो के सपने बदलते रहता है।

और यह बच्चा सिर्फ एक जगह इतनी सी उम्र में ठहर  गया …

mai ban gay hun madam g

अंजलि एक प्राइवेट स्कूल में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर थी, सुबह 8 AM  से  2 PM  तक स्कूल में समय बीतता था।

शाम का समय अंजलि अपने लिए  निकालती जैसे घूमना, बाते  करना, या अपने पसंद का कुछ काम करना।

बस रोज का यही दिनचर्या था।

लगभग स्कूल के शुरू होने के 3 महीने बाद 6 वी कक्षा की क्लास टीचर ने अपने ख़राब हेल्थ की वजह से स्कूल छोड़ दिया।

अब नया  टीचर जल्द से जल्द चाहिए था।

2 – 4 दिन ऐसे ही बीत गए कोई टीचर नहीं मिला। 

अंजलि एक प्राइवेट स्कूल में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर थी, सुबह 8 AM से 2 PM  तक स्कूल में समय बीतता था।

शाम का समय अंजलि अपने लिए  निकालती जैसे घूमना, बाते  करना, या अपने पसंद का कुछ काम करना।

बस रोज का यही दिनचर्या था।

लगभग स्कूल के शुरू होने के 3 महीने बाद 6 वी कक्षा की क्लास टीचर ने अपने ख़राब हेल्थ की वजह से स्कूल छोड़ दिया।

अब नया टीचर जल्द से जल्द चाहिए था।

2 – 4 दिन ऐसे ही बीत गए कोई टीचर नहीं मिला।

प्रिंसिपल ने अंजलि को बुलाया और कोई टीचर नहीं उपलब्ध होने के कारण 6 वी क्लास की क्लास टीचर बनने के लिए कहा।

कोई विकल्प नहीं होने के कारण, दबाव में आकर अंजलि ने हा बोल दिया।

अंजलि का यह पहला ही साल था इस जॉब में…

पहली बार में ही क्लास टीचर बनना वो भी बिना अनुभव के अंजलि के लिए मुशकिल भी था।

जैसे कक्षा में प्रवेश करती है, बच्चो के शोर से पूरा क्लास गूंज रहा था।

बच्चे नयी टीचर को सामने देख कर उत्साहित हो जाते है और पूछते है …आप कौन सा  विषय लेंगी मैडम।

अंजलि का जवाब था, मै आप लोगो की नयी क्लास टीचर हूँ… 

रोज सुबह आप लोगो का उपस्थिति लुंगी और फ़िलहाल कोई क्लास  नहीं लुंगी।

हर महीने 3 दिन आप लोग का जनरल एक्टिविटी का फाइल के लिए आऊंगी। 

बच्चे क्लास टीचर  के लिए कभी पंखा में फूल डालते और मैडम के आने पर फैन चालू कर देते और ताली बजाते।

तो कभी बर्थडे में पूरा क्लास सजाते, केक काटते  क्योकि यह सब बच्चो  को क्लास टीचर के लिए करना होता था।

अब हर महीने आखरी 3 दिन में सभी टीचर को, अपने अपने क्लास में जाकर बच्चो का मानसिक परिक्षण, हाईट, वजन ,हौबी, और वह क्या बनना चाहते है।

इन सब का विवरण उस  फाइल में  भरना पड़ता था।

यह सब नया था अंजलि के लिए, 47 – बच्चो के लिए सिर्फ 3 दिन, बहुत ही कम समय था।

सभी बच्चे अपना हौबी ,क्या बनना चाहते है बताते।

बच्चो में एक सावला सा थोडा हेल्दी लड़का था जो कभी किसी से चीज के लिए तैयार नहीं होता |

वह कोई चीज का उत्तर नहीं देता था अंजलि परेशांन हो जाती उस लड़के का फाइल हमेसशा खाली ही जाता जिसके वजह से मीटिंग में प्रिंसिपल से डाट भी पड़ती थी।

अंजलि अगले महीने उसी लड़के का फाइल भरने का सोचती है,  और उसे सामने बिठा कर सबसे पहले उसी से पूछती है।

पर भी वह लड़का कुछ नहीं बोलता।

अंजलि बहुत गुस्सा हो जाती है और चिल्ला के पूछती है तुम क्या बनना चाहते हो तूम्हारा सपना क्या है…

इतने में वो बच्चा डर के बोलता है मैडम मै बन गया हु। 

अंजलि फिर गुस्सा हो जाती है और पूछती है क्या बन गये तुम …बच्चा चुप हो जाता है।

फिर 2 -3 बच्चे सामने आकर कहते है, मैडम यह पुलिस बन गया है।

अंजलि आश्चर्य से पूछती है अच्छा कैसे बताओ…  

बच्चे बताने लगते है इसके- पापा पुलिस में थे, उनकी डेथ हो गयी यह बड़ा बेटा है जिसके कारण अनुकम्पा में इसे लिया जायेगा।

जब यह बड़ा हो जायेगा तो पुलिस बन जायेगा।

अंजलि अब उसके फाइल में पुलिस मैंन लिखकर फाइल बंद कर उसे देखने लगी।

सोचती है, बच्चा वक्त से पहले ही बचपना भूल गया और हमेशा बहुत गंभीर और शांत रहता है ।

न खेल वाले पीरियड में नीचे जाकर खेलता न बाकि बच्चो की तरह उछल कूद करता। 

यहाँ हर महीने बच्चो के  सपने  बदलते  रहते है…

यह बच्चा सिर्फ एक जगह इतनी सी उम्र में ठहर  गया था ।  

 
 
 
 
 
                                                  
 
 
 
             
  
 
 
 
 
                            
 
 
 
 
 
 

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