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नन्ही चिड़िया

नन्ही चिड़िया

थोड़ी देर बाद छोटी चिड़िया भी अपने परिवार के साथ उड़ गयी।

उसके जाते ही रूही को थोड़ा दुःख तो हुआ।

पर ख़ुशी भी हो रही थी और साथ ही रवि का भी इंतजार था।

की वह क्या बोलेगा….  

नन्ही चिड़िया

प्यार की कोई भाषा  नहीं  होती, बस होता है तो अहसाह जिसको बया कर  पाना मुश्किल है।

ऐसा ही एक प्यारा सा अहसास हुआ रवि और उसके परिवार को. . .

प्यारी  छोटी चिड़िया  ने कराया जिसके आने से थोड़ी ज्यादा खुशिया आ गई थी।

भले ही  कुछ दिनों के लिए ही सही…

रुही को पशु -पछियो  से  प्यार बहुत  था, आज कान्हा का जन्मदिन था 15 जून।

रवि का बेटा  कान्हा आज दो वर्ष का हो जायेगा।

सिओना कान्हा की बहन नटखट और  थोड़ी चुलबुली, सिओना को जब भी मौका मिलता वह घर की छत पर पहुंच जाती।

कान्हा के जन्मदिन के दिन भी वह छत  पर जा रही थी और  सीडी  पर उसे एक नन्ही चिड़िया मिली…

उसने तुरंत आकर रवि को बताया, रवि कान्हा को लेकर सीडी पर पंहुचा।

कान्हा चिड़िया को देख कर बहुत खुश हुआ, उसके हसने की आवाज सुनकर, रूही भी वहा पहुंच गई।

एक ही नजर में  सबका मन नन्ही चिड़िया ने मोह लिया . . .

रवि तेजी से नन्ही चिड़िया के साथी (माता-पिता ) को ढूढ़ने लगा।

लेकिन मिला नहीं तो, रवि ने उसे हाथ में उठाते हुए कहा इसे यहाँ पर अकेला छोड़ना उचित नहीं और घर ले आया।


दोनों बच्चो की खुशी का ठिकाना न था . . . 

चिड़िया को कभी कान्हा बिस्किट, दूध, पानी तो कभी चॉकलेट देता।

जिसे रवि और रूही देख कर सोच में पढ़ गए।

इतनी सी उम्र में कितना परवाह  था नन्ही सी जान के लिए नन्ही सी जान को।

सिओना, उसका नाम क्या राखु इस सोच में डूबी हुई थी।

और आखिरकार रवि के मदद से उसका नाम सिया रख लिए।

दोनों कहने लगे आज सिया का भी बर्थडे मनाएंगे। 

अब कान्हा का बर्थडे सेलीब्रैशन का टाइम भी हो गया।

लेकिन बच्चो का ध्यान सिया पर ही था।

रवि को अलग चिंता सताने लगी की चिड़िया को कैद कर नहीं सकते और बार-बार बाहर जाकर देखता।

उसके माता -पिता उसको लेने आये होंगे लेकिन हर बार मायुस  होकर लौट आते…

लेकिन बच्चो  की यह सब समझ कहा होती है, वो तो उसे अपना नया दोस्त समझ  रहे थे। 


काम ख़त्म कर के रूही बैठी ही थी की रवि ने कहा, चिड़िया को खाना खिला दो शायद तुमसे खा ले।

हम लोग खिलाते – खिलाते थक गए है, ये बहुत छोटी है।

अपनी माँ से ही खाती है लगता है…

रूही ने रवि को देखा और मुस्कुराते  हुए कहा चलो मिल के कोशिश करते है।

और दोनों ने घंटे भर मेहनत की बड़ी मुश्किल से एक-दो बून्द पानी पीया …

रवि बोला ऐसे तो ये मर जाएगी , बहुत कोशिश  के बाद सभी थक गए, फिर थक कर सब सो गए।

दूसरे दिन सुबह 5 am से चिडियो की चहकने के आवाज से रवि की नींद खुली…

बाहर निकला तो दो मैना चिड़िया आकर बैठी थी।

रवि ने बिना देर किये छोटी चिड़िया को बरामदे में रख आया अब छोटी चिड़िया के पास वो दोनों  चिड़िया आकर उसे साथ उड़ाने की कोशिश करते।

छोटी चिड़िया थोड़ी ऊपर उड़ती और निचे गिर जाती करीबन अँधा घंटा ये सब चलता रहा।

रवि और रूही खिड़की सब देख रहे थे।


रवि अब बरामदे पर निकला जैसे ही छोटी चिड़िया के पास गया ,मैना का जोड़ा जोर-जोर से आवाज करने लगा…

ऐसे लग रहा था की खा ही जायेगे दोनों चिड़िया , बिना डरे पास आकर आवाज करने लगे थे।

अब नन्ही चिड़िया ,पूरी कोशिस था दोनों जोड़ा का की दूर चला जाए रवि उन से …

अपने संतान से मोह सभी को होता है एक अटूट प्यार और सुरक्षा जो हर माता -पिता चाहते है ।

वो आज उस नन्ही  चिड़िया के लिए उसके माता-पिता का प्यार  दिख रहा था।


ऑफिस का टाइम हो गया और रवि ऑफिस चला गया।

इधर रूही और बच्चो का ध्यान पूरा टाइम छोटी चिड़िया पर था, अब मैना जोड़ा छोटी मैना के लिए कीड़े लेने लगे।

दिन भर छोटी मैना के लिए कीड़े लाते  रहे. . . 

बच्चे  यह सब देख कर बहुत उत्साहित हो रहे थे।

जब चिड़िया खाने के लिए बड़ा सा मुँह खोलती, बच्चे बहुत खुश हो जाते।

रवि भी ऑफिस से आ गया आते ही रूही से पूछा, चिड़िया कहा है ।

रूही भी उत्सुकता से बताने लगती है, क्या हुआ और कहती है।

उड़ने का प्रयास  बहुत किया पर, रवि बीच  में ही बोल पढ़ा पर क्या, क्यों  नहीं उड़ पाई और मैना जोड़ा चले गए क्या?॥

जवाब नहीं मे सुनकर, रवि तुरंत उसको घर ले के आ गया और अपने हाथो में बिठाकर उसे प्यार करने लगा उससे ढेर सारी  बाते  करने लगा।

जैसे चिड़िया सब कुछ समझ  रही हो , ये सिलसिला 2 -3 दिनों तक चलता रहा।

ऑफिस जाने के पहले रवि चिड़िया को छोड़ता फिर शाम को चिड़िया को वापस घर  ले आता। 

आज सुबह भी रवि चिड़िया को छोड़कर ऑफिस चला गया, रूही का ध्यान अब बाहर ही रहता था।

लेकिन आज 2 -3 घंटे हो गए मैना जोड़ा ने छोटी चिड़िया के लिए कीड़ा(खाना) नहीं लाया।

बस आते छोटी चिड़िया के पास और भाग जाते, और छोटी चिड़िया जोर लगाकर ऊपर उड़ती और नीचे गिर जाती।  

इस बार ज्यादा जोर लगाती हुई चिड़िया छज्जे पर जा बैठती है।

आधा घंटा करीबन वही पर बैठी रही और दोनों मैना जोड़ा मिलकर कीड़ा लाते रहे।

थोड़ी देर बाद छोटी चिड़िया भी अपने परिवार के साथ उड़ गयी। उसके जाते ही रूही को थोड़ा दुःख तो हुआ।

पर ख़ुशी भी हो रही थी और साथ ही रवि का भी इंतजार था की वह क्या बोलेगा…  

 

 

 
 
 
 



                           


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