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फोन कॉल part-2

फोन कॉल  

 

फ़ोन कॉल के पहले भाग में उषा को अपने जीवन में उलझे हुए और अपने आप को खोजने की कोशिश करते पाया अब कहानी का

अगला भाग शुरु करते है।

 

लेकिन इन सबके बावजूत उषा खुश नहीं थी

उसे विनय से कब प्यार था, उसे तो कल भी रोहन और आज भी रोहन से ही  प्यार था

और रोहन के प्यार के लिए आज भी वो कुछ भी कर सकती थी। 

 

 

 


उषा ने  दरवाजा खोला, बच्चे  भागते हुए अंदर आये, आते ही बोले , मम्मा बहुत जोर की भुख लगी है।

इतना सुनते ही उषा किचन में भागते हुए गई और अपने आप से कहा, आज तो मुझे समय का पता ही नहीं चला।

मैंने तो खाना ही नहीं बनाया, और अंदर से माँ जी भी चिल्लाने लगी,  भूखे मारना है क्या बहु आज  ?

 

लेकिन उषा अपने पुराने दिनों में अब भी गुम थी।

उसके दिमाग में अब भी बहुत कुछ चल रहा था और साथ में विनय ने   मैसेज  का  रिप्लाई किया या नहीं यही सोच रही थी।

उषा को आज पिंकी जो उसकी बेस्ट फ्रेंड थी उसकी भी याद आ रही थी।

रोहन के मिलने के बाद उषा ने सब कुछ छोड़ दिया, केवल रोहन ही उसकी पूरी दुनिया बन गया था। 

आज उषा, रोहन की आधी दुनिया भी नहीं थी।

 

उषा यह सोच-सोच कर हमेशा रोती…

और आज बहुत बेचैन हो उठी थी, आज किसी चीज में मन नहीं लग रहा था उषा का।

खाना बनाना तो जैसे आज इतना मुश्किल काम लग रहा था, जैसे-तैसे उसने खाना बनाया और सबको परोस कर अपने रूम में गई।

फिर से फेसबुक ओपन किया, विनय का कोई मैसेज नहीं आया था।

जिसके वजह से उषा थोड़ा उदास होकर बैठ गई, तभी उषा की बेटी ने आवाज दिया।

मम्मा आप भी खाना खा लो, उषा ने कहा नही बेटा आज भुख नहीं है। 

इतना कह कर, फिर से उषा अपने कामो पर लग गई।

लेकिन विनय के रिप्लाई का भी इंतजार था और एक अजीब सी बेचैनी भी…

 

क्या यह सही है?

कही वह गलत तो नहीं कर रही, और  कभी सोचती कौन सा रोहन को मेरी  परवाह है।

ऐसा सोच कर चिढ़ जाती, लेकिन इन सब के बीच घर का काम असत-व्यस्त था।

 

कोई काम सही हो ही नहीं रहा था।

रोहन कब ऑफिस से आया, उषा को पता ही नहीं चला और ऑफिस से आते ही गेट पर उषा का न मुस्कुराता हुआ चेहरा, न  ही चाय की प्याली रोहन को नसीब हुई।

जिसके कारण रोहन बहुत नाराज हो गया और गुस्सा उषा पर उतार भी दिया।

लेकिन उषा ने रोहन को कुछ जवाब ही नहीं दिया,और उषा तो किसी और ही दुनिया में थी।

आज हर काम को करने में उसे परेशानी हो रही थी ।

आज उसके हाथ से  बर्तन भी छूट रहे थे, जिसकी आवाज से घर का हर सदस्य परेशान था । 

फिर दूसरे दिन बच्चो के और पति के जाते ही, लेपटॉप चालु किया जैसे ही फेसबुक खोला विनय के  ढेर सारे  मैसेज थे।

 

जिसे देखते ही उषा के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट बिखर गई।

उषा इस वक्त पंद्रह-सोला साल की लड़की लग रही थी, इस उम्र में जब प्यार का पहला अहसास महसूस  होता है।

ठीक वैसे ही उषा इस वक्त लग रही थी।

विनय का रिप्लाई था, शादी तो किया है…लेकिन अब भी दिल में तुम हो।

और डीपी में पुराना पिक्चर अभी भी लगा रखा है, तो तुम्हारे जाने के  बाद इन सब चीजों से मैं दूर हो गया।

और तुम कैसी हो उषा तुम्हे देखने का मन करता है, फेसबुक से ही तुम गायब थी।

 

बरसो बाद हमारी याद आज कैसे आ गई।

तुम्हारे  कितने बच्चे है, रोहन कैसा है…

और भी बहुत कुछ लिखा था विनय ने।

उषा ने जैसे ही टाइप किया मै ठीक हूँ, विनय तुरंत ऑनलाइन आ गया। 

फिर से एक मैसेज आया…प्लीज़ विडिओ कॉल करूँ क्या?

 

उषा ने कहा-नहीं फिर कभी वीडियो  में बात करेंगे।

फिर दोनों ने लम्बी बाते की फिर उषा ने अपना नम्बर विनय को दे दिया।

विनय के बार-बार कहने पर उषा ने विडिओ कॉल तो नहीं पर अपना सेल्फी सेंड की, बहुत दिनों बाद आज उषा ने मेकअप किया था।

थोड़ी देर बाद विनय का रिप्लाई आया, आज भी बहुत सुन्दर लग रही हो।

 

तुम्हे देख कर लग रहा रोहन से चुरा लू तुमको…

ऐसे पढ़ते ही उषा ने रिप्लाई किया, मै बहुत मोटी हो गई हु।

रोहन अब मुझसे प्यार नहीं करता।

विनय-बोला पागल है वो…

उषा बोली- ठीक है कल बात करते है।

 

विनय-बोला कल क्यों???

उषा बोली-नहीं कल कॉल करना, अब रोहन के आने का टाइम हो रहा,और मुझे घर के काम भी है।

मै 1 pm को  फ्री रहती हु, उसी समय बात करते है।

विनय बोला-ठीक है कल का इंतजार रहेगा, बाय।

उषा को कही न कही अहसास हो रहा था, वह गलत कर रही है।

 

फिर भी विनय से बात करना उसे अब अच्छा लगने लगा था, और चाह कर  भी वह इस उलझन से निकल नहीं पा रही थी।

उसे यह भी अहसास होने लगा था, की कही वह अकेलेपन का शिकार तो नहीं, और इसी कश्मकश में वो रोहन के कपडे जमाने लगती है।

उषा को रोहन के कपड़ो  के बीच एक डायरी मिली।

 

जिसके पहले पन्ने में लिखा था…

उषा और रोहन फिर आगे पलटा तो सारे पेज खाली थे, और लास्ट में एक कविता लिखा था। 

 

एक रिश्ता कमजोर सा बस चुभन बाकी  है

 प्यार जैसे कही खो गया बस अकड़न बाकी  है

 कहते है दो पहिये है, जीवन में ये रिश्ते

 सफर कहा तक है, पता नहीं

 बस दर्द और जलन बाकी  है 

जल ना जाये ये धागा दुरी में कही

 निभाना मुश्किल है, लगता है

 धू धू कर जलना शुरू हो ही गया है 

बस हवन बाकी  है

 

इतना पढ़ते ही उषा के आँखों में अंशु भर आया, और सोचने लगी क्या हर पति-पत्नी का रिश्ता ऐसे ही होता है।

 

मेरा त्याग रोहन को याद नहीं, लेकिन घर में जो लड़ाई होती है।

हम दोनों के बीच वो उसे अच्छे से याद है, और हमारा  रिश्ता बोझ कब से हो गया।

 

यह सोच-सोच कर उषा अपने आप को इतना असहाय समझ रही थी, उसे आज नौकरी न करने का फैसला गलत लग रहा था।

जिस घर को अपना समझ कर सजोया था, वह अपना था नहीं, साथ ही अपने माता-पिता के साथ धोखा का आज पश्ताप था…

उसे हर बार रोहन कहता था, जो लड़की अपनी माता-पिता का न हो सकी वो मेरी क्या होगी।

 

लेकिन उषा को हमेशा लगता की रोहन गुस्से में ऐसा बोल देता है।

लेकिन आज रोहन की डायरी ने उषा के जीवन में तूफान ला दिया था, उसके अश्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।

उषा आज दिल से रो रही थी, साथ ही जीवन में आगे बढ़ने का साहस भी बटोर रही थी। 

उषा ने विनय को फ़ोन किया और बात करने लगी, और सब कुछ विनय को बताया और विनय ने भी सहानुभूति दिखाई।

 

अब विनय और उषा की बाते रोज होने लगी, दोनों एक-दूसरे को हर एक चीज बताने लगे थे।

कॉल से अब विडिओ कॉल होने लगा।

 

उषा ने सजना-सवरना फिर से शुरू कर  दिया था।

लेकिन रोहन को अब भी किसी बात का कोई परवाह नहीं था।

उसने कभी ध्यान ही नहीं दिया की आज उषा ने क्या पहना है या उसने कुछ अलग किया । 

लेकिन इन सबके बावजूत उषा खुश नहीं थी, उसे विनय से कब प्यार था।

 

उसे तो कल भी रोहन और आज भी रोहन से प्यार था…

और रोहन के प्यार के लिए आज भी वो कुछ भी कर  सकती थी।

 

उषा ने एक फैसला लिया, और सुबह उठते ही रोहन से बोली।

रोहन मै फिर से नौकरी करना चाहती हूँ, और रोहन का जवाब था,  तुमको जो सही लगे… 

 




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