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प्रकृति का अनमोल तोहफा

         ब्राम्ही ब्रेन बुस्टर 

छत्तीसगढ़ का  मुसकानी भाजी 



ब्राम्ही (बकोबा मोनिरि) का पौधा  भारत के लगभग हर क्षेत्र में पाया जाता है।

गीली मिट्टी पर यह तेजी से फैलता है और इसके जड़ और तना मिट्टी में चिपके होते है पत्ती ऊपर की तरफ होता है।

ब्राम्ही के सेवन से याददाश्त के साथ -साथ एकाग्रता भी बढ़ती है।

ब्राम्ही की तसीर ठण्डी होती है,और स्वाद फीका होता है। 


आयुर्वेद में रोगो के उपचार में जड़ी-बूटी का उपयोग होते आ रहा है।

जिसमे से ब्राम्ही भी एक है। छत्तीसगढ़ में ब्राम्ही के पत्तो की सब्जी बनाई जाती है ब्राम्ही को जलनिम्ब भी कहा जाता है।

क्योकि यह पौधा नमी वाले स्थानों  पाया जाता है। ब्राम्ही एक बारहमासी पोधा है।

प्राचीन ग्रंथ चरक सहिंता व सुश्रुत सहिंता में भी ब्राम्ही का उल्लेख किया गया है।

ब्राम्ही शब्द हिंदु देवता ब्रम्हा से लिया गया है। ब्राम्ही का पौधा रसीला होता है और ब्राम्ही का पौधा अधिक मात्रा में जल को संग्रहित कर सकता है।

फूल का रंग सफ़ेद ,गुलाबी और नीला रंग का होता है। 


सेवन से होने वाले लाभ:

ब्राम्ही के सेवन करने से पहले अपने चिकत्सीय सलाहकार से एक बार सलाह जरूर ले ले।

आइये जानते है ब्राम्ही से होने वाले लाभ को …

स्मरण शक्ति बढ़ाए:-

ब्राम्ही के सेवन से सबसे महत्वपूर्ण लाभ स्मृति ,एकाग्रता और दिमाग को तेज करने में उपयोग होता है।

आयुर्वेद में ब्राम्ही को उपयोग दिमाग को तेज बनाने में होता आ रहा है।

ब्राम्ही के पाउडर को दूध या घी के साथ लेने का सलाह दिया जाता है। 

अल्जाइमर :-

डिमेंशिया व अल्जाइमर जैसे विकारो को दूर करने की क्षमता ब्राम्ही में होती है।

ब्राम्ही में एमिलॉइड यौगिक  के पाए जाने की वजह से, यह अल्जाइमर  की रोकथाम करने में सहायक होती है। 

ब्राम्ही ,इसके अल्वा अल्जाइमर होने पर दिमाग में होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। 

तनाव व चिंता को करे दूर :

ब्राम्ही कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में सहायक होती है। कोर्टिसोल को  तनाव हार्मोन के रूप में जाना जाता है।

प्रतिदिन ब्राम्ही के 2 -4 पत्तो को चबाकर खाने से तनाव से दूर रहा जा सकता है। 

प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में :-

ब्राम्ही का नियमित उपयोग करके स्वस्थ रहा जा सकता है। ब्राम्ही में मौजुद  एंटी-ऑक्सीडेंट और पोषक तत्व शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढाती है।

जिससे रोगो से लड़ने की क्षमता विकसित  होती है, साथ ही स्वस्थ जीवन शैली के लिए एंटी-ऑक्सीडेंट आवश्यक है। 

जो की ब्राम्ही में भरपूर रूप से पाया जाता है, एंटी-ऑक्सीडेंट कैंसर के रोकथाम में भी सहायक  होता है।

ब्राम्ही के नियमित उपयोग से पाचन तंत्र मजबूत बनती है।

इसके लिए रोजाना 2 -4 पत्ती चबाकर खाना  चाहिये।

या चाय में पत्ती डाल कर पी  सकते है। ब्राम्ही की सुखी पत्ती का भी इस्तेमाल कर  सकते है। 

स्वशन स्वास्थय के लिए :

ब्रांकाइटिस ( स्वशन नली में होने वाले सूजन ),रक्त-संकुलन (शरीर के किसी एक भाग में रक्त का जमाव ),कफ और साइनस ब्लॉकेज होने पर ब्राम्ही का उपयोग किया जा सकता है।

ब्राम्ही  कफ और ब्लगम को बाहर निकालने के साथ सूजन को कम करके सास लेने में राहत देती है।

ब्राम्ही का प्रतिदिन सेवन से शारीरिक समस्या दूर किया जा सकता है।

इसके लिए ब्राम्ही के पत्ते या पॉवडर  इस्तेमाल कर  सकते है। 

बालो को लम्बा ,घना व काला बनाने में :-

ब्राम्ही का उपयोग होता आ रहा है ,ब्राम्ही में एंटी-ऑक्सीडेंट योगिक  पाया जाता है।

जो बालो में होने वाली समस्या को दूर करने में सहायक होती है।

ब्राम्ही के तेल का नियमित उपयोग से बालो के स्वास्थय के साथ-साथ रूशी ,रूखे बाल।

और सर में खुजली की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है। 

छत्तीसगढ़ का भाजी मुसकानी 

ब्राम्ही के पत्तो को छत्तीसगढ़ में सब्जी बना कर  खाते है।

मुसकानि भाजी गीली मिट्टी पर मिलती है ,यह अधिकतर नदी-नालो और खेत पर पाया जाता है।

ब्राम्ही हर मौसम में मिलता है और इसका स्वाद फीका होता है। इसकी सब्जी बहुत स्वादिष्ट  बनती है। 


तो आइये बनाये मुसकानी भाजी आसान तरीके से  …

समाग्री :-

एक पाव मुसकानी भाजी ,चना दाल आधा कटोरी (छोटा),दो टमाटर,हरी मिर्च  5-6 ,लहसुन की 10 -12 कलिया।

नमक स्वादानुसार , तेल 2 छोटा चमच्च 

विधि :-

सबसे पहले ब्राम्ही के पतों को साफ कर  ले और साफ़ पानी से धो कर  रख ले

एक कुकर में चना दाल धो कर डाल दे ,कटा हुआ टमाटर और साथ में भाजी को भी डाल कर नमक डाल दे।

कुकर को गैस पर मीडियम आंच पर रख दे।

लगभग तीन सिटी आने तक पकाये, अब गैस बंद करके ठंडा होने का इंतजार करे। 

एक कढ़ाई में तेल डाल कर ,तेल के गर्म होने का इंतजार करे।

अब इसमें कटी हुई मिर्च व लहसुन डाल कर  गोल्डन ब्राउन होने तक पका ले।

कुकर को ओपन करके भाजी को अच्छे से मिला कर।

अब कढ़ाई में डाल देंगे अब एक मिनट तक पकने देंगे।

अब आपका मुसकनी भाजी  तैयार है  ,इसे रोटी  या चावल के साथ गरमा-गर्म सर्व करे।  

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