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साबूदाना

टैपियोका(कसावा)


भारत में साबूदाना केवल “टैपियोका ” की जड़ से बनाया जाता है इसे “कसावा ” के नाम से जाना जाता है।

साबूदाना छोटे -छोटे सफ़ेद  मोती  के दानो के सामान होता है। 

साबुदाना

भारत में सबसे पहले साबूदाना का उत्पादन तमिलनाडु के सेलम में हुआ था।

साबूदाना बनाने के लिए कसावा की जड़ को कुट कर ,कसावा की जड़ से निकलने वाले दूध को छान कर जमने के लिए छोड़ दिया जाता है।

फिर इससे छोटी -छोटी गोलिया बना कर सेका जाता है। 


साबूदाना के उत्पादन में भारत अग्रिम देशो में से एक है।  

साबूदाना प्रोटीन और फाइबर का एक बेहतर विकल्प हो सकता है, शाकाहारियों के लिए।

इसमें कैल्शियम ,आयरन ,विटामिन -k ,विटामिन -बी 6 ,पोटैशियम ,सोडियम ,जिंक ,कापर ,मैग्नीशयम और कार्बोहाइड्रेड पाया जाता है।

 साबूदाने के फायदे :-

वजन बढ़ाने में :-

कैलोरी और  कार्बोहाइड्रेड की अधिक मात्रा पाई जाती है ,वजन बढ़ाने में ये दोनों तत्व साहयक होते है।

वजन बढ़ाने साबूदाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 

मजबूत हड्डियों के लिए :- 

 कैल्शियम ,मैग्नीशयम  और आयरन की आवश्यकता होती है।

साबूदाना में कैल्शियम ,मैग्नीशयम  और आयरन की पार्यप्त मात्रा पाई जाती है।

और ये तत्व हड्डियों की मजबूती व विकास के लिए आवश्यक होते है। 

ऊर्जा के लिए:-

साबूदाना में कैलोरी ,प्रोटीन के साथ -साथ कार्बोहाइड्रेड भी पाया जाता है।

जो शरीर में ऊर्जा बढाती है और थकान महसुस नहीं होती। 

उच्च रक्त चाप में  :

उच्च रक्त चाप के मरीजों के लिए साबूदाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है इसमें फइबर ,पोटेशियम और फास्फोरस होता है।

जो बड़े हुए रक्तचाप को कंट्रोल करने में मदद करता है। 

एनीमिया :-

शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और कमजोरी के साथ आयरन की कमी हो तो एनीमिया के लक्षण हो सकते है।

साबूदाना में आयरन की मात्रा पाई जाती है जो लाल रक्त कणिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है।

जो की एनीमिया से निजात पाने में सहयक हो सकते है।

सुचरु पाचन तंत्र :-

साबूदाना में फइबर और प्रोटीन पाई जाती है जो पाचनतंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है।

और कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है। 

 नुकसान :-


किसी भी वस्तु का सही उपयोग ही फायदेमंद होता है।

साबूदाना का सही मात्रा में सेवन जरुरी है, नहीं तो इसके दुष्परिणाम सामने आ सकते है :-

1.साबूदाना में अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेड पाया जाता है। कार्बोहाइड्रेड के अधिक सेवन मधुमेह का कारण बन सकता है।

साथ ही साबूदाना के सेवन से मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को बचना चाहिए। 

2.कैलोरी की अधिक मात्रा के कारण ,अधिक मात्रा में सेवन से वजन बढ़ने की समस्या  हो सकती है। 

3. साबूदाना में कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है।

साबूदाना के अधिक सेवन से किडनी स्टोन की समस्या हो  सकती  है। 

भारत के अलग -अलगहिस्सों में अलग -अलग तरह के पकवान साबूदाना से बनाये जाते है।

और साबूदाना का उपयोग खासकर फलाहार के रूप में होता है :-साबूदाना बड़ा 

चलिए बनाते है साबूदाना बड़ा :-

सामग्री :-

एक कटोरी भीगे हुए साबूदाना ,4 मीडियम साइज के उबले हुए आलु,2 बड़े बारीक़ कटे प्याज ,हरा धनिया ,हरी मिर्च 3 -4 कटे हुए।

नमक स्वदानुसार ,डीप फ्राई के लिए आयल

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विधि :-

              
सबसे पहले साबूदाना को धो कर भीगा लेंगे,भीगने के लिए एक बड़े बाऊल में साबूदाना को डाल ले।

अब उतना ही पानी डाले जिससे साबूदाना डुब जाये ।

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आलू उबाल कर अच्छे से मैस कर  ले।

अब इसमें कटा प्याज ,कटी हुयी धनिया,कटा मिर्च और नमक डाल लेंगे ।

आलू उबाल कर अच्छे से मैस कर  ले ,अब इसमें कटा प्याज ,कटी हुयी धनिया,कटा मिर्च और नमक डाल लेंगे 

साबूदाना, दाना को डाल कर अच्छे से मैस कर लेंगे इसके बाद छोटे -छोटे गोला बना कर रख लेंगे

कड़ाई में तेल डाल कर हाई फ्लेम में गैस में रख देंगे,जब तेल अच्छे से गर्म हो जाये

बनाये गए गोलों को हल्के हाथ से प्रेस करके तेल में छोड़ते जायेगे । 

बड़े को दोनों तरफ गोल्डन ब्राउन होते तक फ्राई कर लेंगे।

अब इसे टिसू पेपर में डाल कर अतिरिक्त तेल निकाल लेंगे

                            

  • लो जी आपका साबूदाना बड़ा तैयार हो गया है | 
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2 thoughts on “साबूदाना

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