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स्पर्श

स्पर्श

 

नितिन और शुभी की शादी को सात साल पुरे होने को आये और अब जा कर शुभी की गोद भरने वाली थी

दोनों को बहुत बेसब्री से इंतजार था इस दिन का… 

 

जो अब जा कर पूरा होने वाला था

दोनों के साथ-साथ परिवार वाले भी खुश थे और नन्हे मेहमान का सबको इंतजार था। 

 

 

                                                                      स्पर्श

 

 

 

नितिन और शुभी को एक -एक दिन अब सालो का अहसास करा रहा था

और शुभी कभी सोचती लड़का होगा,कभी लड़की,और नितिन ने नाम भी सोच रखा था।

दोनों को अब इंतजार था, माता-पिता बनने का जैसे-जैसे महीने गुजरते,शुभी को इंतजार ही नहीं हो राहा था।

कभी वो स्वेटर बुनती, तो कभी मोजे,कभी बेबी बॉय के कपडे,तो कभी बेबी गर्ल के लिए कपडे,तो कभी कहती जितना मैंने कपडे लिया है,लड़का हो या लड़की।

 

मै, उसे ये सारे कपडे पहनाऊँगी…

आप कुछ मत बोलना नितिन बीच में,और दोनों को वो दिन भी नसीब हो गया।

 

शुभी को लेबर पेन शुरू हो गया और हॉस्पिटल जाने का टाइम भी आ गया।

…नितिन थोड़ा  घबराते  हुए बोला,सब ठीक होगा शुभी। 

थोड़ी देर में नर्स बाहर आई,और बोली बधाई हो, आपको लड़की हुई है।

 

नितिन ने खुश होते हुए बोला, क्या मै  मिल सकता हु।

नर्स बोली हा बिलकुल पर शगुन के बिना नही और नितिन लगभग भागते हुए अपनी नन्ही पारी के पास गया।

तुरंत गोद में लेकर अपनी पत्नी को बोला नैना नाम है इसका अभी से,ठीक हैं न … 

शुभी बोली नाम आप ही को रखना था और मुस्कुराने लगती है । 

 

 

देखते ही देखते नैना एक साल की हो गई और शुभी और नितिन को भी समय का आभाष ही नहीं हुआ।

एक दिन शुभी की बुआ मिलनेआई, तो शुभी से कहा देखो तुम बुरा मत मानना, लेकिन मुंझे लगता है नैना

देख नहीं सकती।

इसे अच्छे डॉक्टर को दिखा लाओ, तो शुभी ने रोते हुए कहा मुझे भी ऐसा बहुत दिन से लग रहा है।

और नितिन को भी,पर हमे विश्वाश नहीं होता लेकिंन अब लगता है,हमें डॉक्टर के पास जाना चाहिए …

 

 

और दोनो पति -पत्नी दूसरे ही दिन डॉक्टर के पास चल दिए,सारे टेस्ट करवाने के बाद दो घंटे वही रुकना पड़ा।

 

लेकिन इस बीच  दोनों पति -पत्नी में कोई बात नहीं हुई।

दोनों के चेहरे में परेशानी साफ झलक रही थी, दो घंटे बीतने के बाद नर्स ने अंदर जाने का इशारा किया।

दोनों अब अंदर पहुंच चुके थे और डॉक्टर को उम्मीद से देख रहे थे।

 

डॉक्टर ने बोलना  शुरू किया नैंना को कभी दिखाई नहीं दे पायेगा

नैना जीवन भर नहीं देख पायेगी, आप लोग हिम्मत से काम लो…

और नैंना को भरपूर प्यार दो और कोई रास्ता भी नहीं है। 

 

ऐसा सुनते ही शुभी के आँखों से अंशु बहना शुरू  हो गया और नितिन किसी तरह अपने आप को सम्हालते

हुए। शुभी को हिम्मत देने की कोशिश करता है

दोनों घर पहुंच जाते है और पहुंचते  ही प्रश्न था सबका…

 

क्या हुआ, क्या बोले डॉक्टर…

शुभी, बेटी को गोद में  लेकर रोते हुए कमरे में चली गई ।

जो डॉक्टर ने कहा था, वह सब बाते परिवार वालो को नितिन ने बता दी।

सबने सुनने के बाद बस  यही बोला,बहुत  दिनों के बाद संतान सुख मिला उसको भी ग्रहण  लग गया . . .

 

 

नितिन बिना कुछ बोले अपने कमरे में गयाऔर शुभी का हाथ पकड़ कर  कहा।

शुभी नैना नहीं देख सकती तो क्या हुआ,उसमे ना हमारी गलती है न नैना की।

 

ऊपर वाला एक दिन सब ठीक कर देगा।

जब हमें पता नहीं था तो हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता था, आगे भी ऐसे ही जियेंगे… जैसे कुछ हुआ ही नहीं है।

और न कभी नैना को महसूस होने देंगे की वो देख नहीं सकती।

उस नन्ही पारी के आने से हमें सब ख़ुशी मिली हम दोनों की जिंदगी खुसियो से भर गयी।

 

उसने वो हर ख़ुशी  दी, जो हर बच्चा अपने माता-पिता को देता  है।

नैना के आने से ही हमें पता चला, माता-पिता बनकर कैसा महसूस होता है।

हम दोनों ने नया अनुभव पाया वो सारी  खुशियाँ  मिली जिसे हम बरसो से तलाश रहे थे।

 

फिर एक कमी के वजह से हम दुखी क्यों रहे है ।

हमारी नैना को हम,अब भी उतना ही प्यार करते है न  …

 

शुभी बोली, मै यह सोच के रो रही की मेरी नैना कभी रंग-बिरंगी दुनिया नहीं देख पायेगी।

और तो और बहुत से काम पर दुसरो पर ही निर्भर रहेगी।

 

नितिन…  कौन सा  माँ-बाप का साथ,जीवन भर का होता है।

नितिन कुछ बोल नहीं पाया, पर इन सब बातो से वो भी वाकिफ था। 

 

 

नैना अब नौ साल की हो गई थी,और वह स्पर्श से ही समझ जाया करती कौन है।

इस स्पर्श से  जान लेती की कौन प्यार कर रहा और कौन  नफरत।

अपने खिलोनो और अपने कपडे, जुते सब कुछ वो स्पर्श की भाषा से समझ जाया करती थी।

 

लेकिन उसे प्यार की भाषा समझ आती थी

माँ की चूड़ी, पायल, और स्पर्श बहुत अच्छे से  समझ आता था।

माँ के  स्पर्श की जगह कोई नहीं ले सकता था नैना के जीवन में । 

 

जब नैना माँ की गोद में होती तो अपने छोटे-छोटे हाथो से माँ के बाल को छूती और बोलती माँ बहुत लम्बे है…

आपके बाल और आप बहुत सुन्दर भी हो ,ऐसा सुनकर माँ के आंख में अंशु आ जाते और नैना को बोलती तुम्हे कैसे पता मै सुन्दर हु।

 

नैना बोलती क्योकि आप बहुत प्यार करते हो  मुझसे, मुझसे जो  प्यार करता है… वो  मुझे  सुन्दर लगता है।

नैना पूछती, मै कैसे दिखती हु माँ … इसका उत्तर माँ नहीं दे पाती।

और मन ही मन सोचती भगवान ने मेरी नैना को कितना सुन्दर बनाया है।

नैंना के आंख भी बहुत सुन्दर  है, पर रोशनी से ही दूर रख दिया। 

 

 

नैना के साथ खेलने कुछ और बच्चे भी आते थे, जो पड़ोस में ही रहते थे।

कभी खेल, खेल में  एक दूसरे से पूछते तुमको कौन  सा रंग पसंद है…

और नैना कुछ जवाब देती उसके पहले ही बच्चे बोल पढ़ते अरे तुमको तो दिखाई नहीं देता न।

 

नैना उन बच्चो से  पूछती कौन-कौन से रंग होते है।

रंग कैसे दीखते है, बच्चो का जवाब भी उतना माशूम होता था।

लाल रंग टमाटर का  होता है, लाल रंग का फूल होता है…

और भी बहुत कुछ बोलते बच्चे, नैना बोलती मुझे कैसे मालूम टमाटर कैसा  है या लाल रंग का फूल।

हा गुलाब की खुसबू मुझे बहुत पसंद है और मुझे फूलो की कोमलता भी अच्छी  लगती है। 

 

 

सभी बच्चे नैना से बोलते नैना तुम बहुत सुन्दर हो, तुम्हरा रंग दूध जैसा सफ़ेद है।

तुम पर लाल रंग बहुत खिलता है और तुम्हारे बाल काले और घुंघराले है।

नैना रुक कर बोलती, तुम सब बहुत सुन्दर हो, सभी बच्चे हैरानी से पूछते, कैसे पता तुम्हे।

उनमे से एक बच्ची बोलती, मै तो बहुत काली हु, मेरे रंग के कारण मुझे चिढ़ाते भी है।

नैना बोलती मुझे कला रंग का तो पता नहीं, पर तुम लोगो के आने से मुझे ख़ुशी मिलती है।

 

बच्ची फिर बोलती है।

आंख बंद करो तो जो रंग दीखता है वही कला रंग है।

नैना बोलती काला रंग के कारण  ही और रंग नहीं देख पाती मै, लेकिन तुम सब बहुत सुन्दर हो…

तुम्हारे स्पर्श से पता चलता है तुमसब  मुझसे प्यार करते  हो।

 

जब भी बारिश होती, नैना अपने हाथ आगे बड़ा देती और बूंदो के स्पर्श से खुश हो जाया करती।

कभी-कभी उसे लगता काश  बूंदो को देख पाती, चिड़ियों की चहचाहट बस  सुनी है।

उसे देखने का मन भी करता था, नैना को।

प्रकृति के वो सारी खूबसूरती को देखने का मन होता जिसे सिर्फ स्पर्श किया है।

नैना सोचती, मैंने तो इंसान को भी नहीं देखा सिर्फ कल्पना है।

 

जिसे स्पर्श से जाना है, अक्षर भी तो मेरी स्पर्श की भाषा है …

नैना को हमेशा लगता दुनिया कितनी ही रंग-बिरंगी क्यों न हो, मुंझे स्पर्श की भाषा ही समझ आती है।

एक स्पर्श से ही व्यक्ति के नीयत का भी आभाष कर पाती हु।

मुझे स्पर्श से ही समझ आ जाता है, प्यार और नफरत।

 

कोई कितना बदसूरत है, यह उसके स्पर्श से ही मै समझ जाया करती हु।

जो खामी है मेरे जीवन में उसे स्पर्श की भाषा ने पूरा कर  दिया है। 

 

 

नैना को हमेशा एक ही स्पर्श हमेशा एक सा लगता, वो था नैना की माँ का स्पर्श।

 

आज जब नैना 21 वर्ष की हो गई तो भी स्पर्श वही था,प्यार और सुरक्षा का अहसास जो उसे पिता के स्पर्श

से महसूस होता था, वो  नहीं बदला था। 

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