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स्वपन की दुनिया – ( पार्ट -1)

स्वपन की दुनिया

                    

स्वपन की दुनिया होती है, सबसे अनोखी

यहाँ पर सबको सब कुछ मिल जाता है, यहाँ पर सिर्फ वो होता है जो आप चाहते है।

 

और इस अनोखी दुनिया में सिर्फ प्यार होता है, हकीकत से परे इस दुनिया में सब कुछ

आसानी से मिलता है।

ऐसी है यह कहानी नेहा की   .. . स्वपन की दुनिया

 

 


नेहा आठ साल की लड़की जो गरीब परिवार से थी, तीन भाई बहन में सबसे बड़ी और पिता का साया

सर से उठ गया था।

माँ सबके घर बर्तन, झाड़ू -पोछा का काम करती थी।और दादी जो नेहा के नजदीक थी…

 

साथ ही माँ ने अब नेहा को भी घर का काम सिखाना शुरू कर दिया था।

नेहा घर के पास के ही, सरकारी स्कुल में पढ़ने जाती और आते ही खेलने चली जाती।

जो माँ को बिलकुल अच्छा लगता और गुस्से में नेहा को सब दोस्तों के ही सामने चिल्लाती।

 

नेहा अब तुम बड़ी हो गई हो अब तुम्हारा खेलने का उमर नई है।

घर चलो और काम में मेरी मदद करो. . .

और ऐसा माँ के मुँह से सुनते ही नेहा को बहुत बुरा लगता।

लेकिन कुछ बोल नहीं पति और चुपचाप माँ के पीछे-पीछे चल देती।

 

लेकिन अपना मन वही पर छोड़ जाती। 


नेहा को बर्तन धोना बहुत बुरा लगता था पर माँ के डर से करना पड़ता था।

सुबह उठाते ही और शाम में स्कुल के आते ही, नेहा का यही काम होता था।

 

लेकिन उसका मन बहुत करता था…सहेलियों के साथ खेलने को, सब काम ख़त्म करके नेहा कैंडल की

रोशनी में पढ़ा करती थी।

और रात में अपने बिस्तर में जाते ही सपनो की दुनिया में खो जाती थी।

अपने सपनो की दुनिया में कभी झुला झुलती, तो कभी उछाल-कुद करती तो कभी लुका-छुपी खेलती…

 

यहाँ पर उसे कोई रोकने वाला भी नई होता कोई।

नहीं उसे यहाँ पर बर्तन धोने पढ़ते…

 

सुबह होते ही, जब सपनो की दुनिया से बाहर आती तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट फ़ैल जाती थी।

आखिर सपने तो अपने होते है, और उसमे अपना अधिकार होता है। 


अपना काम करके स्कूल जाना और घर आकर फिर से अपने काम को जल्दी – जल्दी ख़त्म करना।

ताकि उसके खेलने को जाने मिले लेकिन हर बार कभी दादी तो कभी माँ टोक दिया करती और हमेशा  एक

ही बात कहती।

 

तुम अब बड़ी हो गयी हो, नेहा मनमे सोचती मई बड़ी हो गयी।

पर मेरी उम्र की सहेलिया कैसे बड़ी नहीं हुई।  वो तो खेलती है… 


अब नेहा 12 साल की हो गई थी, और नेहा को टीले वाला फ़्राक बहुत पसंद आता था।

उस फ़्राक को पहन के वो गोल-गोल घूमा करती थी।

 

एक दिन माँ ने उसके हाथ मे 2-3 सलवार सूट लाकर दे दिया।

और कहा,नेहा अब यही पहनोगी … नेहा बेमन से हाँ कह देती है ।

 

अब नेहा घर के साथ -साथ, माँ के साथ दूसरे घर का भी कम कम करने लगी।

अब शायद उसे अमीरी गरीबी का फर्क थोड़ा समझ मे आने लगा था।

नेहा दिखने मे बहुत सुंदर थी, तो दादी हमेसा उसको कहा करती थी।

नेहा तुम बड़े घर की बहू बनोगी, एक बात जो दादी हमेसा नेहा को कहती थी।

 

लड़कियों की दो जिंदगी होती है, एक मायका और दूसरा ससुराल।

तुमको जो सुख यहाँ नहीं मिल पा रहा है, वह सब कुछ तुमको ससुराल में जरूर मिलेगा ।


और ऐसा कहते हुए हर बार वह नेहा को गले लगा लेती….

अब नेहा बड़ी हो रही थी, और स्वपन की दुनिया में खेलने नहीं जाती थी।

बल्कि कभी सुन्दर सी राजकुमारी बनती, तो कभी सुन्दर सी परी बनती।

 

बादलो को घूरती, उसे अब सुन्दर-सुन्दर कपडे आकर्षित करने लगे।

कभी तितली बनके उड़ती, तो कभी झरनो में नहाती, इस तरह वह सब सपनो में जी लिया करती।

 

सुबह होते ही स्वपन की दुनिया भी चली जाती….

और जैसा दिन शुरू होता, रोज की तरह वैसा ही शुरू होता।

लेकिन अब नेहा को यह काम न कठिन लगता, और न ही बुरा लगता।

 

वह समझ चुकी थी, की गरीब होने के साथ ही वह एक लड़की भी है।

उसे यह सब काम करना ही है, और नेहा को इस बात से कोई दुःख नहीं था


नेहा अब 16 साल की हो गई थी, और स्वपन का सिलसिला तो अब भी जारी था।

 

अब सपने मे अपने राजकुमार को देखती, कभी सफ़ेद घोड़े पर तो कभी महंगी गाड़ी पर वह राजकुमार उसके सपने में आता…

जो उससे बहुत प्यार करता, हर तरह से ख्याल रखता, सपनो वाला राजकुमार कभी -कभी गुलदस्ता भी लाता।

यहाँ गरीब नहीं थी, सपनो की दुनिया में गरीबी-अमीरी नहीं होता।

नेहा सुन्दर -सुन्दर कपड़ो में सजती, वह परी सी लगती फिर सुबह होते ही राजकुमार चला जाता।

 

और नेहा के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ जाती ।

नेहा को दादी की वह बात याद आती की उसकी दूसरी जिंदगी खुशनुमा रहेगी….

अब नेहा 12 वी पास हो गई थी, और अब उसके लिए रिश्ते भी आने लगे थे।

नेहा को अहसास होने लगा था, यहाँ राजकुमार गरीब और अमीर के हिसाब से मिलता है।

और हकीकत में आते ही, उसे अपनी दादी की सारी बाते अब झूठी लगने लगी थी ।
 

एक दिन, उसका रिश्ता तय भी हो गया।

उसका होने वाला पति सरकारी स्कूल में एक चपरासी था और उससे 10 साल बड़ा भी

                                                                                                      to be continued…..

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