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उम्मीद

उम्मीद 

 

वर्तमान और भविष्य की कड़ी 

 

 

इस कहानी  के माध्यम से यह बताने का प्रयास  किया है की आपकी जीवन केवल

 

आपकी नहीं होती है। जो आपके लिए वर्तमान और भविष्य के सपने देखते है

उनकी भी होती है। 

 

स्नेहा ने अपने आप को ही ख़त्म नहीं किया था …आइये शुरु करते है कहानी उम्मीद ।।

वर्तमान और भविष्य की कड़ी 

 

 

साथ ही अपने माता-पिता के विश्वाश प्यार और उम्मीद को ख़त्म कर दिया था।

umeed
Through this story we have tried to tell that your life is only
You don’t Those who dream for you present and future
Also occurs.

स्नेहा पढाई में बहुत तेज थी,  PMT  की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् मेडिकल की पढाई

कर रही थी, हॉस्टल में रहती थी, बहुत चंचल और हंसमुख  स्वभाव की लड़की थी।  

 

माता पिता  की एकलौती संतान थी। जब भी छुट्टियों में घर जाती घर में मानो त्यौहार सा हो जाता। 

 

उसके माता-पीता को भी कभी अहसास ही नहीं हुआ की स्नेहा बेटी है। 

दोनों बहुत खुश थे,स्नेहा को पाकर। 

 

स्नेहा अपने कॉलेज की आखरी साल में पहुंच गयी थी, अब तो सबको इंतजार था|

बेटी  कब डॉक्टर बनेगी और कब जरुरत मंद और परिवारो वालो की सेवा और सहारा

बनेगी।

 

आखरी सेमेस्टर की  परीक्षा चल रही  थी, और शाम को स्नेहा के हॉस्टल से फोन आया की

स्नेहा ने पंखे के सहारे फाँसी  लगा ली है। 

 

इतना सुनते ही पिता के हाथ से मोबाइल गिर गया।

और अपनी पत्नी को कुछ बताता इससे पहले ही पत्नी ने फोन उठाया और जो सुना उसके

सुनते ही वही बैठ गयी|

 

आँखों में आंसू भी नहीं निकल रहे थे बस दोनों बहुत देर तक ऐसे ही वही पड़े रहे, बिना कुछ

बोले सुने बस बेसुध से , वही एक दूसरे को देखते बैठे रहे। 

 

फिर हिम्मत जूटा कर स्नेहा के  पिता  ने स्नेहा की माँ को पानी दिया, बिना कुछ बोले एक

दूसरे को देख रहे थे।

और मन में एक ही सवाल था क्या कमी हो गयी थी, जो स्नेहा ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। 

 

सुबह होते होते स्नेहा की लाश घर पर आ गयी थी सारा मोहल्ला रिश्तेदार इकठ्ठा हो गया था। 

 

सबको आश्चर्य हो रहा था, जो स्नेहा हमेशा  हस्ते मुस्कुराते रहती थी।

स्वभाव से चुलबुली नटखट वो ऐसा कैसे कर सकती है। 

 

कोई हिम्मत दे रहा था तो कोई दर्द को और बढ़ा रहा था।

तो कोई कह रहा था एक संतान  के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

तो कोई कह रहा था … बेटियों को इतना पढ़ाया  ही क्यों? 

शादी हो गयी होती तो ऐसा नहीं होता, वक्त रहते बच्चो पर लगाम लगाना जरुरी होता है। 

 

ये सब आजकल के बच्चे मूवी -पिक्चर देख के सीखते है, मोबाइल तो बच्चो को देना ही

नहीं  चाहिए, ज्यादातर उसी से बिगड़ते  है। 

 

यह सब बाते स्नेहा के माता – पिता के कानो पर पड़  रहे थे, पर वो दोनों ये सब समझने के

स्थिति में थे नहीं। 

 

अभी मन में केवल एक ही सवाल था, क्या गलती हो गई परवरिश में , जो बेटी को कठिनाईयों

से लड़ने का हुनर भी नहीं सीखा पाए। 

 

बेटी की लाश के सामने बैठी माँ अपनी बेटी को एक टक देख रही थी।

पर आँखों में आंसू  बिलकुल नहीं थे। 

 

बहुत देर तक ऐसे ही बैठी रही फिर बोली तुम तो पढाई में ठीक थी।

और क्या कारण था जो , तुमने ऐसा किया …

स्नेहा जवाब दो …  जवाब  दो स्नेहा …. करके रोने लगी। 

 

सभी रिश्तेदारों ने सम्हाला लेकिन किसी में  इतनी हिम्मत नहीं थी। 

 

स्नेहा के माँ को रोने से रोक सके।

स्नेहा के पिता भी टूट चुके थे, स्नेहा ने आत्महत्या की थी …

लेकिन उसके माता – पिता का क्या जिसने उसके लिए सपने बुने थे ,अभी तो सारे  सपने

अधूरे थे। 

 

आज स्नेहा के माता – पिता के अरमानो ने आत्महत्या कर ली थी, दोनों तो जीते जी मर गए थे। 

 

बेटी का क्रिया कर्म होते ही सभी रिश्तेदार भी चले गए।

पहले भी दोनों अकेले ही रहते थे, लेकिन यह अकेलापन अब काटने को दौड़ता था। 

 

अब सुबह से शाम कब होती पता ही नहीं चलता खाना – पीना उठना बैठना हँसना बोलना सब

बंद हो चूका था।

बस दिन भर एक ही सवाल मन में घूमते  रहता आखिर स्नेहा ने ऐसा क्यों किया। 

 

स्नेहा के पिता एक दिन बैठे ही थे की फोन की घंटी बजी, फोन उठाया तो उसकी बेस्ट फ्रेंड

अंजलि का फोन था।

उसने कहा अंकल फोन करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। 

 

स्पीकर पर होने की वजह से स्नेहा की माँ को सुनाई दे गया।

स्नेहा की माँ भागते हुये आयी और बिना कुछ पूछे सीधे बोली स्नेहा ने ऐसा क्यों किया … तुम्हे

पता है क्या ?

 

अंजलि ने शुरू में बातो को घुमाया , स्नेहा की माँ ने  थोड़ा सख्ती से पूछा  तब अंजलि ने कहा

आंटी वह  लड़का उसे धोखा दे दिया। 

 

कौन लड़का तुम क्या बोल रही हो, ऐसा होता तो स्नेहा बराबर बताती  मुझे… 

 

 फिर थोड़ा डरते हुए अंजलि ने बोला, हां आंटी अभिनव नाम है उस लड़के का।

 

उसने धोखा दिया … उसने किसी और लड़की से शादी कर ली है।  

 

फोन रख तो दिया स्नेहा के माँ ने पर सोच में पढ़ गई …

दो दिन के प्यार के लिए … 20 बरस के प्यार को भूल गयी मेरी बेटी। 

 

ऐसा नहीं हो सकता हम दोनों ने जितना प्यार दिया उसे कभी किसी बात की पाबन्दी नहीं

लगाई, लेकिन उसने बताना भी उचित नहीं समझा। 

 

लेकिन अभी भी  उसके माँ को  यकीन नहीं हो  रहा था, वह उसके कॉलेज और हॉस्टल

जाकर पता करने का सोच रही थी और  दूसरे दिन पति के साथ निकल गयी। 

 

हॉस्टल पहुंचते ही उसे वह पहला दिन याद  आने लगा ।

जब स्नेहा को छोड़ने दोनों  आये  थे  स्नेहा की ख़ुशी  देखते ही बन रही थी।

स्नेहा बार -बार कह रही थी, पापा मै  ग्रामीण इलाके  में पोस्टिंग लुंगी वहां ग्रामीणों  की खूब

सेवा करूंगी ।

और माँ आपके लिए पहली तनख्वाह से सिल्क की साड़ी लुंगी। 

 

दोनों यह सब सुन कर बहुत खुश हो रहे थे, स्नेहा के पिता प्राइवेट नौकरी करते थे। 

 

छोटी सी तनख्वाह थी, लेकिन बेटी की दृढ निश्चय ने आज उस कमी को पूरा कर दिया था । 

बेटे और बेटी के फर्क को मिटा दिया था स्नेहा ने। 

 

सरकारी कॉलेज में स्नेहा का एडमिशन भी हो गया। 

जो की बहुत ख़ुशी की  बात थी। 

 

स्नेहा के माता-पिता यादो में गोते लगा ही रहे थे, की पीछे से एक आवाज आई …

और वो अपनी स्नेहा की यादो से बहार आ गए । 

 

पीछे देखा तो कविता थी जो की स्नेहा की  रूममेट थी। 

दोनों ने स्कूल भी साथ में ही किया था, कविता को सामने देख कर स्नेहा की माँ को एक पल

के लिए लगा स्नेहा सामने हो। 

 

स्नेहा की माँ ने लम्बी सास भरते हुए कहा कैसी हो बेटा …

स्नेहा ने कहा ठीक हूँ आंटी  बस स्नेहा के जाने के बाद सब कुछ बदल गया है। 

 

आगे कहा चलो कही बैठते है, कह कर कविता आगे चलने लगी।

और स्नेहा के माता पिता उसके पीछे -पीछे .. 

 

स्नेहा के माता-पिता और कविता आमने-सामने बैठे थे ।

कुछ देर के बाद कविता ने कहा …कविता ऐसा करेगी ऐसा विश्वाश अभी भी नहीं होता। 

 

इस बात को 2 महीने हो चुके लेकिन मै ठीक से सो भी नहीं पाई रोज याद आती है।

अब नीता के साथ रहती हूँ ….. 

 

स्नेहा के माता-पिता  बस सुन ही रहे थे साथ सोच रहे थे …   क्यों छोड़ा था यहाँ पर लोगो का

कहना क्या सही था। 

 

फिर दोनों साथ बोल पड़े , बेटा  क्या तुम्हे पता है स्नेहा ने ऐसा क्यों किया ?????

 

कविता थोड़ा डरते हुए बोली … कारण वो लड़का था, उसने स्नेहा को धोखा दिया। 

 

स्नेहा के माता-पिता फिर बोले क्या यही कारण था।

जो उसको  हम सबका प्यार नजर नहीं आया…….  या तुम कुछ छुपा रही हो

 

कविता ने कहा नहीं आंटी  …..रात रात भर रोते  देखा है । 

 

और कोई वजह होती तो मुझे जरूर बताती…

स्नेहा की माँ ने कहा  स्नेहा हमेसा  अनीता मैडम का जिक्र किया करती थी। 

 

क्या हम मिल सकते है अभी उनसे … 

कविता ने कहा, हा चलो आंटी  मैडम  का घर पास में ही है। 

 

स्नेहा के माता-पिता  अनीता मैडम के घर पहुंच कर अपना परिचय दिया।

उसके बाद एक उम्मीद से  देखते हुए स्नेहा के पिता ने कहा,  आपको पता है स्नेहा ने ऐसा क्यों

किया। 

 

मैडम गंभीरता से बोली मुझे कारण तो नहीं पता लेकिन कुछ दिनों से परेशान थी, मैंने बहुत

बार कहा भी इस बीच, की घर चले जाओ। 

 

स्नेहा जैसी होनहार छात्र  से ऐसी उम्मीद  मुझे भी नहीं थी। 

थोड़ी देर में स्नेहा के  माता-पिता वहां से निकल गए और रास्ते  भर यही सोच रहे थे की स्नेहा

ने  ऐसा क्यों किया। … 

 

कब अपने उजड़े हुए आशियाने में पहुंचे उनको पता ही नहीं चला और स्नेहा की माँ अपने

कमरे में जाकर बैठ गई। 

कमरे के अंधरे में एक कोने में बैठ कर क्या -क्या सोच रही थी।

फिर अलमारी खोला,  जैसी ही अलमारी खोला  कुछ फोटो नीचे  गिर गए….. 

 

लाइट ऑन किया तो देखा स्नेहा के बचपन के फोटो थे।

…. हर पल को इन तस्वीर में कैद कर लिया था, उस वक्त कहाँ पता था की ये खुशियाँ  कुछ

दिन के लिए है। 

 

जिन फोटो को देख कर होठो पर मुस्कान आती थी, आज उन  फोटो  को देख कर आँखों में

आंसू  भर आये थे। 

 

स्नेहा के पिता जैसे कमरे में आये चाय लेकर पत्नी को देखा स्नेहा के फोटो के साथ तो वो पहला

अहसास याद आया जब स्नेहा को पहली बार गोद में लिया था। 

स्नेहा को बढ़ते देख दोनों के सपने भी बड़े हो रहे थे ….   कितना कुछ सोचा था। 

 

लेकिन कभी ऐसा होगा नहीं सोचा था।

दोस्त  रिश्तेदार ने बहुत समझाया था, स्नेहा के पिता को की हॉस्टल में बच्चे बिगड़ जाते है,

लेकिन स्नेहा पर पूरा भरोसा जो था। 

 

जीवन के साथ ही सारे रिश्तो और सपनो का महत्व रहता है। 

अगर  जीवन नहीं रहेगा तो किसी चीज का क्या महत्व। 

लेकिन अब यह कहना स्नेहा के पिता के लिए व्यर्थ था, क्योकि स्नेहा जा चुकी थी।

अपने साथ सारे सपने लेकर। 

 

इस बात को दो साल होने को आये थे।

लेकिन स्नेहा के माता – पिता को अब भी यकीन कर पाना मुश्किल था। 

 

स्नेहा ने अपने आप को ही ख़त्म नहीं किया था …

साथ ही अपने माता-पिता के विश्वाश प्यार और उम्मीद को ख़त्म कर दिया था। 

 

 

4 thoughts on “उम्मीद

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