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वो खूबसूरत टीवी

वो खूबसूरत टीवी

 

और वो पापा का दीवाल वाला वो खूबसूरत टीवी को याद करके, अभी भी विनि के चेहरे में बड़ी सी मुस्कुराहट आ जाती है।

और हमेशा एक बात कहती है, काश वो टीवी फिर वापस आ जाय ……. वो खूबसूरत टीवी

  

 

 

 

विनि जब सात-आठ साल की थी तब शर्मा अंकल, जो  विनि के मुहल्ले के आखरी घर में निवास  करते थे।

एक नया टीवी लेकर आये थे।

शर्मा अंकल पहले व्यक्ति थे, इस मुहल्ले में जिसने टीवी ख़रीदा था। जो उस समय की  बड़ी बात थी। 

अब रोज शाम को सारे बच्चे शर्मा जी के यहाँ पहुंच जाते, और जो चलता उस टाइम टीवी पर, बड़े मजे से देखते।

 

कभी-कभी मुहल्ले की महिलाये भी जाती, जब महाभारत या रामायण का प्रसारण टीवी पर होता।

बड़े आदर भाव से सारी महिलाये, बड़े बुजुर्ग और बच्चे टीवी देखते…

उस वक्त सबको महसुस होता, की साक्षात भगवान आ गए।

 

सीरियल शुरू और ख़त्म होने के बाद सभी प्रणाम भी करते। 

विनि भी खुश होती, बच्चो का मन वैसे भी मासूम होता है, उन्हें दुनियादारी की समझ कहा होती है।

एक टीवी आने से मुहल्ले में प्यार और रौनक बढ़ गई थी।

साथ ही विनि सोचती टीवी के अंदर भी एक दुनिया होगी जो हमारी ही तरह होगी।

और जब भी बड़ी मासूमियत से पूछती अपनी माँ से, की क्या एक दुनिया और है टीवी के अंदर….. 

 

माँ जवाब में जोर से हँस  दिया करती …    

गांव में हरियाली बहुत थी, साथ ही बारिश बहुत होती थी।

जिसके वजह से गांव में कई हफ्तों तक बिजली चली जाती थी।

जब भी ऐसा होता गांव की रौनक भी चली जाती, क्योकि सबको सीरियल का इंतजार जो होता।

 

विनि उन दिनों भगवन को बहुत मानती की, बिजली जल्द आ जाये।

चूकी उसे परी की कहानी जो देखनी होती थी, जो कि उसकी फेवरेट  सीरियल थी। 

परी की कहानी विनि को बहुत आकर्षित करती थी, टीवी में उसने देखा था…

 

एक तालाब के अंदर लाल-कमल का फूल था, जिसमे परी रहती थी।

जो बच्चो की विश पूरा करती, बच्चे परी से ढेर सारा खिलौना ,चॉकलेट ,और जलेबी समोसे मगवाते।

परी तुरंत ले कर आ जाती। 

विनि हमेशा सोचती, हमारे गांव के तालाब में भी लाल कमल है।

 

क्या उसमे भी परी होगी?

और कभी-कभी दोपहर में माँ सो रही होती, तो चुपके से तालाब पहुंच जाती।

और जोर-जोर से परी को आवाज देती….लेकिन परी नहीं आती।

तो विनि उदास होकर तालाब  के नीचे  शिव मंदिर में चली जाती, मंदिर के चारो ओर कैट (खट्टा फल ) का पेड़ था।

 

जो फल विनि को बहुत पसंद था।

तेज हवा के कारण पेड़ से जब फल गिर जाया करता तो विनि से उठा लेती और घर चल देती। 

कभी-कभी विनि अपने पिता से बड़ी मासूमियत से सवाल करती, हमारे यहाँ टीवी क्यों नहीं है?

पिता चाह कर भी कुछ बता नहीं पाते।

बारिश के दिनों में बहुत तितलियाँ घर में आती थी।

 

जो खूबसूरत तो होती ही थी और बहुत बड़ी भी होती थी। 

गांव में सभी लोग जल्दी सो जाया करते थे, क्योकि बिना लाइट के समय बहुत लम्बी सी महसूस होती थी।

विनि भी सो जाया करती थी, तो कभी-कभी वो बड़ी सी तितली घर की दिवार पर बैठ जाया करती।

जहाँ पर विनि का बिस्तर लगा रहता था।

जब भी कोई खूबसूरत तितली घर पर आती….

 

उसके पिता बड़े प्यार से विनि के सर में हाथ फेरते और कहते देखो बेटा दीवाल पर रंगो वाला खूबसूरत

टीवी…….

ऐसा सुनते ही विनि झट से बैठ जाया करती और दीवाल पर खूबसूरत तितली को देख कर खुश हो जाती। 

उस तितली को कैंडल की रोशनी में घंटो पूरा परिवार निहारता लेकिन किसी को बोरियत महसूस नहीं होती थी।

 

उस वक्त पूरा परिवार एक छोटे से खटिया में समां जाता था।

जब भी रंगबिरंगी तितली घर आती, तो विनि को सबसे सुन्दर वो बादलो के  रंगो वाली तितली लगती। 

विनि जब 21 साल की हुई तब उसके घर भी टीवी आ गया, लेकिन उसे टीवी से उतना प्यार नहीं था।

अब और अब बिजली भी नहीं जाती थी, साथ ही घर में नया सोफा भी आ गया था।

लेकिन शर्मा अंकल के टीवी में बात ही कुछ और थी।

 

जब जमीन में साथ बैठ के सारा मुहल्ला टीवी  देखा करते  थे। 

और वो पापा का दीवाल वाला टीवी को याद करकेअभी भी विनि के चेहरे में बड़ी सी मुस्कुराहट आ जाती है। 

और हमेशा एक बात कहती, काश वो टीवी फिर वापस आ जाय….                                                                                                                                                                                 

 

 

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